रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने लगभग ₹52,000 करोड़ की नई पूंजीगत अधिग्रहण परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। यह फैसला पारंपरिक हथियारों की बजाय हाई-टेक युद्धकौशल और स्वदेशी रक्षा निर्माण को बढ़ावा देने की ओर एक बड़ा कदम है।
₹52,000 करोड़ के बड़े सौदे को मिली हरी झंडी
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की बैठक में, नए रक्षा खरीद प्रस्तावों के लिए 'आवश्यकता की स्वीकृति' (AoN) जारी कर दी गई है। इन परियोजनाओं का कुल मूल्य लगभग ₹52,000 करोड़ है। खास बात यह है कि इस बार का फोकस लड़ाकू विमानों या युद्धपोतों जैसे भारी प्लेटफॉर्म पर नहीं, बल्कि अत्याधुनिक युद्धक तकनीक, जैसे ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर (EW) सिस्टम, और मिसाइल सिस्टम पर है। वायु सेना के लिए हाई-एल्टीट्यूड स्यूडो-सैटेलाइट सिस्टम को भी मंजूरी मिली है।
हाई-टेक युद्ध पर रणनीतिक बदलाव
यह राशि इस साल के रक्षा अधिग्रहण के लिए निर्धारित कुल पूंजीगत बजट का करीब 28% है। यह स्पष्ट संकेत देता है कि सशस्त्र बल अब लगातार निगरानी, स्वायत्त संचालन और उन्नत हवाई सुरक्षा पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। ड्रोन, AI-संचालित सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर पर इस जोर का मतलब है कि सरकार रक्षा उद्योग को उच्च-मूल्य, प्रौद्योगिकी-केंद्रित विनिर्माण की ओर ले जा रही है। इससे तैयार प्लेटफॉर्म के आयात पर निर्भरता कम होगी और सेंसर, रडार व गाइडेंस सॉफ्टवेयर जैसे महत्वपूर्ण घटकों के घरेलू विकास को बढ़ावा मिलेगा।
रक्षा इकोसिस्टम पर असर
इस नीतिगत बदलाव से उन कंपनियों को सीधे फायदा होने की उम्मीद है जो मिशन सिस्टम, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर के क्षेत्र में विशेषज्ञता रखती हैं। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL), जो रडार, संचार प्रणाली और EW इंटीग्रेशन में मजबूत उपस्थिति रखती है, इस सेगमेंट में एक प्रमुख खिलाड़ी मानी जा रही है। वहीं, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और मिसाइल इंटीग्रेशन से जुड़ी अन्य फर्मों को भी इन परियोजनाओं के टेंडरिंग चरण में आगे बढ़ने पर अधिक काम मिलने की उम्मीद है। सरकार ने यह भी अनिवार्य किया है कि पूंजीगत अधिग्रहण बजट का लगभग 75% घरेलू उद्योग पर खर्च किया जाए, जिससे भारतीय निर्माताओं के लिए एक स्थिर मांग बनी रहेगी।
निवेशकों के लिए क्या है मायने?
स्वदेशी विकास की ओर यह कदम स्थानीय उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा देने के सरकारी लक्ष्यों के अनुरूप है। हालांकि, निवेशकों के लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि प्लेटफॉर्म निर्माण से जटिल इलेक्ट्रॉनिक्स की ओर यह बदलाव निष्पादन समय-सीमा (execution timelines) पर कड़ी निगरानी की मांग करता है। AI-संचालित ड्रोन और EW सूट जैसे उन्नत सिस्टम के विकास में अनुसंधान और परीक्षण के उच्च जोखिम शामिल हैं। कंपनियों को टेक्नोलॉजी अवशोषण और डिलीवरी की समय-सीमा को पूरा करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। निवेशकों को यह भी ध्यान देना चाहिए कि इन तकनीकों का संभावित बाजार आकार बड़ा है, लेकिन राजस्व की वास्तविक प्राप्ति टेंडरिंग प्रक्रिया और अंतिम अनुबंध पर निर्भर करेगी।
निवेशकों को क्या ट्रैक करना चाहिए?
शेयरधारकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 'आवश्यकता की स्वीकृति' (AoN) से लेकर औपचारिक 'प्रस्ताव के लिए अनुरोध' (RFP) जारी होने और अंतिम अनुबंध अवार्ड तक की प्रगति पर नज़र रखी जाए। प्रमुख रक्षा ठेकेदारों के तिमाही ऑर्डर बुक अपडेट को ट्रैक करने से यह स्पष्टता मिलेगी कि ₹52,000 करोड़ के इस आवंटन का कितना हिस्सा वास्तव में पुष्ट ऑर्डर में बदल गया है। इसके अलावा, प्रबंधन की टिप्पणी, विशेष रूप से एंटी-ड्रोन इकाइयों और कामिकाजी ड्रोनों जैसे उच्च-तकनीकी प्रणालियों के विकास की स्थिति पर, कंपनियों की तकनीकी तत्परता का आकलन करने में मदद करेगी।
