रक्षा मंत्रालय ने स्वदेशी स्टार्टअप्स और MSMEs को बढ़ावा देने के लिए ₹2,400 करोड़ का प्रोक्योरमेंट बजट और नई तकनीक के लिए ₹1,500 करोड़ का फंड जारी किया है।
भारत सरकार ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्रालय ने अब खास तौर पर घरेलू स्टार्टअप्स और MSMEs के लिए ₹2,400 करोड़ का प्रोक्योरमेंट बजट तय कर दिया है। इसका सीधा मकसद भारतीय डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग नेटवर्क को मजबूत करना और विदेशी आयात पर निर्भरता को कम करना है।
नई तकनीक पर सरकार का फोकस
सिर्फ खरीदारी ही नहीं, सरकार भविष्य की लड़ाइयों के लिए भी तैयार है। इसके लिए ₹1,500 करोड़ का अलग प्रोजेक्ट फंड भी पास किया गया है। यह राशि अगली पीढ़ी के डिफेंस टेक्नोलॉजी के रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) में खर्च होगी। इसमें आधुनिक डिजिटल सिस्टम और हाई-टेक उपकरण शामिल हैं, जो भारतीय सेना की नई सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में मदद करेंगे।
बाजार के लिए क्या मायने हैं?
अब तक डिफेंस सेक्टर पर बड़े सरकारी उपक्रमों (DPSUs) और बड़ी प्राइवेट कंपनियों का कब्जा रहा है। इस फैसले से अब सेक्टर में छोटे और फुर्तीले प्लेयर्स को मौका मिलेगा।
- शानदार ग्रोथ: भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट ₹686 करोड़ (FY 2013-14) से बढ़कर ₹38,000 करोड़ (FY 2025-26) तक पहुंच चुका है।
- आत्मनिर्भरता: भारतीय सेना की 90% से ज्यादा गोला-बारूद की जरूरतें अब देश में ही पूरी हो रही हैं।
निवेशकों के लिए जरूरी सतर्कता
डिफेंस सेक्टर में ग्रोथ की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन निवेशकों को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। रक्षा सौदों में काम पूरा करने में काफी वक्त लगता है और मिलिट्री स्टैंडर्ड्स के हिसाब से प्रोडक्शन क्षमता बढ़ाना छोटी कंपनियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। साथ ही, सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स में पेमेंट साइकिल लंबी होती है, जो छोटी कंपनियों के कैश फ्लो पर असर डाल सकती है। निवेशकों को नजर रखनी चाहिए कि कैसे ये स्टार्टअप्स अपने प्रोटोटाइप को बड़े लेवल के मैन्युफैक्चरिंग में बदलते हैं।
