Defence Acquisition Council (DAC) ने भारतीय सेना को आधुनिक बनाने के लिए **₹2.12 लाख करोड़** के प्रस्तावों को हरी झंडी दे दी है। इस बजट का **82%** हिस्सा घरेलू मैन्युफैक्चरिंग पर खर्च होगा, जिससे देश की डिफेंस कंपनियों के लिए बड़े ऑर्डर की राह खुल गई है।
स्वदेशी तकनीक पर जोर
सरकार का मुख्य फोकस 'मेक इन इंडिया' है। मंजूरी मिलने वाले हथियारों और उपकरणों में 82% हिस्सा भारत में ही तैयार होगा। इसमें लॉन्ग-रेंज कामिकेज़ ड्रोन (Kamikaze drones), एयर डिफेंस सिस्टम, कॉम्बैट हेलीकॉप्टर, सेल्फ-प्रोपेल्ड आर्टिलरी और नौसेना के लिए एडवांस्ड डिकॉय सिस्टम शामिल हैं। यह कदम चीन और पाकिस्तान की सीमाओं पर सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए उठाया गया है।
निवेशकों के लिए क्या है मतलब?
भले ही सरकार ने ₹2.12 लाख करोड़ के प्रस्ताव को 'Acceptance of Necessity' (AoN) दे दी है, लेकिन निवेशकों को इसे ऑर्डर बुक में तुरंत नहीं जोड़ना चाहिए। AoN सिर्फ सरकारी इरादे को दर्शाता है, जिसके बाद टेंडर जारी होते हैं और फिर कॉन्ट्रैक्ट साइन होता है। इसमें समय लगता है।
डिफेंस कंपनियों के स्टॉक्स पहले ही काफी बढ़ चुके हैं और कई कंपनियां प्रीमियम वैल्युएशन पर ट्रेड कर रही हैं। मुनाफा तभी बनेगा जब कंपनियां समय पर प्रोजेक्ट्स पूरा करेंगी और रॉ-मटेरियल की बढ़ती लागत के बीच अपने मार्जिन (Margins) को बचाए रखेंगी।
आगे क्या ट्रैक करें?
आने वाले समय में यह देखना जरूरी होगा कि टेंडर कितनी तेजी से बाहर आते हैं और किन कंपनियों को बड़े ऑर्डर मिलते हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि जिन कंपनियों के पास अपनी खुद की R&D और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी है, वे इस दौड़ में ज्यादा आगे निकल सकती हैं।
