IIT-Madras द्वारा इनक्यूबेटेड स्टार्टअप Inbound Aerospace ने **2028** तक अपना पहला ऑटोनॉमस और रीयूजेबल स्पेसक्राफ्ट लॉन्च करने का लक्ष्य रखा है। कंपनी इसके लिए **$25 मिलियन** तक की सीड फंडिंग जुटा रही है।
मिशन और तकनीक
चेन्नई स्थित यह स्टार्टअप एक रीयूजेबल स्पेसक्राफ्ट बना रहा है, जिसे खास तौर पर प्रिसिजन लैंडिंग (Precision Landing) के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें स्काईडाइविंग में इस्तेमाल होने वाले पैराशूट जैसी तकनीक का उपयोग होगा, जिससे यह किसी भी तय जगह पर सटीक लैंडिंग कर सके। अभी यह तकनीक Technology Readiness Level 4 पर है और कंपनी 1 किलोमीटर की ड्रॉप टेस्ट सफल कर चुकी है। आगे चलकर 3, 8 और 30 किलोमीटर की ऊंचाई पर इसके और परीक्षण किए जाएंगे।
बिज़नेस मॉडल और संभावनाएं
Inbound Aerospace का फोकस 'माइक्रोग्रैविटी रिसर्च' मार्केट पर है, जो फार्मा और मटेरियल साइंस कंपनियों के लिए काफी अहम है। कंपनी को हर मिशन से $3 मिलियन से $4 मिलियन तक के रेवेन्यू की उम्मीद है। इसके अलावा, कंपनी अपनी पैराशूट तकनीक को डिफेंस और इमरजेंसी रिस्पॉन्स सेक्टर में भी बेचने की तैयारी में है।
भारतीय स्पेस सेक्टर और चुनौतियां
भारत के उभरते स्पेस इकोसिस्टम में Skyroot Aerospace और Agnikul Cosmos जैसे खिलाड़ी पहले से मौजूद हैं। Inbound Aerospace ने SpaceX और Skyroot जैसी कंपनियों के साथ साझेदारी की संभावना तलाशनी शुरू कर दी है। लैंडिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी को पूरा करने के लिए कंपनी ने ऑस्ट्रेलिया के Space Angel Group के साथ एक एग्रीमेंट भी किया है।
हालांकि, एरोस्पेस सेक्टर में रिसर्च और डेवलपमेंट का खर्चा और लंबी समय सीमा एक बड़ी चुनौती है। निवेशकों की नज़र अब कंपनी की इस फंडिंग राउंड को बंद करने की क्षमता और आगामी टेस्टिंग माइलस्टोन्स पर टिकी है।
