IIT-Madras के इनक्यूबेटेड स्टार्टअप AstraYAN ने भारतीय नौसेना के नए कॉर्वेट्स (Corvettes) के लिए प्रोपल्शन सिस्टम इंटीग्रेशन का बड़ा कॉन्ट्रैक्ट हासिल कर लिया है। कंपनी ने विदेशी दिग्गजों को पीछे छोड़ते हुए यह उपलब्धि हासिल की है, जो ₹53,866.5 करोड़ के रक्षा ऑर्डर का अहम हिस्सा है।
भारतीय रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, IIT-Madras के डीप-टेक स्टार्टअप AstraYAN ने बाजी मार ली है। कंपनी को भारतीय नौसेना के 'नेक्स्ट जनरेशन कॉर्वेट्स' (NGC) के लिए प्रोपल्शन सिस्टम इंटीग्रेशन (PSI) का ठेका मिला है। इस रेस में AstraYAN ने इटली की Fincantieri और जर्मनी की RENK जैसी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को पीछे छोड़ दिया है।
डिफेंस सेक्टर में बड़ा प्रभाव
यह कॉन्ट्रैक्ट रक्षा मंत्रालय के उस बड़े प्रोग्राम का हिस्सा है, जिसमें Garden Reach Shipbuilders & Engineers (GRSE) और Goa Shipyard Limited (GSL) को कुल ₹53,866.5 करोड़ के ऑर्डर दिए गए हैं। इस समझौते के तहत GRSE 5 कॉर्वेट्स और GSL 3 कॉर्वेट्स बनाएगी। AstraYAN इन जहाजों के लिए जटिल 'कंबाइंड डीजल और गैस टर्बाइन-क्रॉस-कनेक्ट' प्रोपल्शन सिस्टम को मैनेज करेगी।
सामने हैं बड़ी चुनौतियां
हालांकि यह भारतीय टेक्नोलॉजी के लिए गर्व का विषय है, लेकिन निवेशकों और रक्षा विशेषज्ञों की नजरें इस स्टार्टअप के काम पर टिकी रहेंगी। AstraYAN का इनकॉर्पोरेशन 2025 की शुरुआत में ही हुआ है। अनुभव की कमी और एक नई निजी कंपनी होने के नाते, इसके सामने ऑपरेशंस को तेजी से स्केल करने का भारी दबाव है। चूंकि इनके पास इस तरह के जटिल सिस्टम को डिलीवर करने का पुराना ट्रैक रिकॉर्ड नहीं है, इसलिए प्रोजेक्ट की टाइमलाइन और कॉस्ट ओवररन पर नजर रखना बहुत जरूरी होगा।
फिलहाल यह प्रोजेक्ट 'प्राइस नेगोशिएशन' स्टेज में है, जो अगले 1 महीने में पूरा होने की उम्मीद है। इसके बाद शिपयार्ड्स के साथ फाइनल एग्रीमेंट साइन किया जाएगा। डिफेंस सेक्टर के जानकारों के लिए यह देखना दिलचस्प होगा कि यह स्टार्टअप अपनी पहली बड़ी परीक्षा में किस तरह का प्रदर्शन करता है।
