IIT Madras के शोधकर्ताओं ने एक क्रांतिकारी बायोमिटिक विंग तकनीक विकसित की है, जो विमानों को एयरोडायनामिक स्टॉल से बचाएगी और फ्यूल एफिशिएंसी को बढ़ाएगी।
IIT Madras की टीम ने विमानों की स्टेबिलिटी को बेहतर बनाने के लिए एक 'मॉर्फिंग स्किन' तैयार की है। यह तकनीक पक्षियों के पंखों के लचीलेपन से प्रेरित है, जो उड़ान के दौरान अपनी शेप को बदल सकते हैं। इस नवाचार का मुख्य उद्देश्य एयरोडायनामिक स्टॉल जैसी स्थितियों को रोकना है, जहां अचानक हवा के दबाव में बदलाव के कारण विमान लिफ्ट खो देते हैं।
कैसे काम करती है यह तकनीक?
इस सिस्टम में 'Macro Fibre Composite' (MFC) स्ट्रिप्स का इस्तेमाल किया गया है। ये स्मार्ट मैटेरियल की तरह काम करते हैं और हवा के बहाव के हिसाब से खुद को एडजस्ट करते हैं। इससे पंखों का आकार वास्तविक समय में बदलता रहता है, जिससे विमान कठिन स्थितियों में भी अपना नियंत्रण नहीं खोते और ऊंचाई बनी रहती है।
एयरोस्पेस इंडस्ट्री के लिए क्या हैं मायने?
इंडस्ट्री के लिहाज से यह एक बड़ी राहत हो सकती है। पारंपरिक विमानों में विंग्स को एडजस्ट करने के लिए भारी और जटिल मैकेनिकल सिस्टम का उपयोग होता है, लेकिन यह नई तकनीक वजन में हल्की और पुरानी मशीनों में आसानी से फिट की जा सकने वाली (Retrofit) है।
निवेशकों के लिए जरूरी बात
फिलहाल यह पूरी तरह से एक अकादमिक रिसर्च प्रोजेक्ट है, जिसका किसी भी लिस्टेड कंपनी से सीधा जुड़ाव नहीं है। इसलिए, स्टॉक मार्केट पर इसका तुरंत असर नहीं दिखेगा। हालांकि, आने वाले समय में अगर कोई कमर्शियल पार्टनरशिप या टेक्नोलॉजी ट्रांसफर होता है, तो यह भारतीय एयरोस्पेस और डिफेंस सेक्टर के लिए आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है। फिलहाल, इस तकनीक को सर्टिफिकेशन और मटेरियल टिकाऊपन (Material Fatigue) जैसे बड़े तकनीकी परीक्षणों से गुजरना बाकी है।
