Indian Coast Guard अब अपनी समुद्री निगरानी को मजबूत करने के लिए AI-आधारित सॉफ्टवेयर अपना रहा है। देसी डिफेंस कंपनियों के साथ साझेदारी से आयात पर निर्भरता कम होगी, जो डिफेंस सेक्टर के निवेशकों के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
Indian Coast Guard (ICG) ने अपनी ऑपरेशनल रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए समुद्री सीमाओं की सुरक्षा के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को शामिल करने का ऐलान किया है। इसका मुख्य उद्देश्य ड्रोन जैसे आधुनिक खतरों से निपटना है। डायरेक्टर जनरल एस. परमेश ने स्पष्ट किया है कि बल अब एक हाइब्रिड मॉडल की ओर बढ़ रहा है, जिसमें स्थानीय इनोवेशन और चुनिंदा विदेशी तकनीक का मिश्रण होगा।
मेड-इन-इंडिया तकनीक पर जोर
इस आधुनिकीकरण का सबसे अहम हिस्सा भारतीय डिफेंस पब्लिक सेक्टर यूनिट्स (DPSUs) के साथ बढ़ता सहयोग है। स्वदेशी सॉफ्टवेयर का उपयोग करके ICG विदेशी सिस्टम्स पर अपनी निर्भरता को खत्म कर रहा है। यह कदम सरकार के 'आत्मनिर्भर भारत' एजेंडे के अनुरूप है। निवेशकों के लिए यह खबर काफी मायने रखती है, क्योंकि निगरानी, संचार और इंटेलिजेंस सॉफ्टवेयर की बढ़ती मांग भारतीय डिफेंस कंपनियों के लिए रेवेन्यू का एक बड़ा जरिया बन गई है।
ऑपरेशन्स में टेक्नोलॉजी और इंसानी दखल
भले ही ICG नई तकनीकों को अपना रहा हो, लेकिन डायरेक्टर जनरल ने यह साफ कर दिया है कि AI केवल एक सहायक टूल है। फिजिकल इंस्पेक्शन और संदिग्ध जहाजों की जांच के लिए अभी भी 'बूथ्स-ऑन-ग्राउंड' यानी मानवीय मौजूदगी अनिवार्य है। इसका मतलब है कि केवल सॉफ्टवेयर ही नहीं, बल्कि पेट्रोल वेसल्स और इंटरसेप्टर बोट्स जैसे हार्डवेयर की डिमांड भी लगातार बनी रहेगी।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
डिफेंस सेक्टर को ट्रैक करने वाले निवेशकों को अब उन कंपनियों पर नजर रखनी चाहिए जो डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स, रडार सिस्टम और शिप निर्माण में लगी हैं। सरकार का स्वदेशी तकनीक के प्रति कमिटमेंट इन कंपनियों के ऑर्डर बुक और तिमाही नतीजों में लंबी अवधि के लिए मजबूत आधार प्रदान कर सकता है।
