एयर चीफ मार्शल AP Singh ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत अपनी मिलिट्री 'थियेटराइजेशन' (Theaterization) के लिए किसी विदेशी मॉडल की नकल नहीं करेगा। IAF का मानना है कि एयर पावर पर केंद्रीय नियंत्रण ही ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी के लिए जरूरी है। डिफेंस सेक्टर के निवेशकों के लिए यह रिफॉर्म्स काफी मायने रखते हैं क्योंकि इन्हीं के आधार पर भविष्य के डिफेंस ऑर्डर्स और सरकारी बजट तय होंगे।
एयर चीफ मार्शल AP Singh ने देश में चल रहे मिलिट्री थियेटराइजेशन रिफॉर्म्स पर इंडियन एयर फोर्स का रुख साफ कर दिया है। 'थियेटराइजेशन' का मतलब है आर्मी, नेवी और एयर फोर्स को एकीकृत कमांड में जोड़ना ताकि बेहतर तालमेल और रिसोर्स मैनेजमेंट हो सके। एयर चीफ का तर्क है कि भारत की सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए हमें अपनी जरूरत के मुताबिक स्ट्रक्चर बनाना होगा, न कि दूसरे देशों के मॉडल की कॉपी करना होगा।
एयर पावर पर IAF का जोर
IAF का मुख्य कंसर्न 'एयर पावर' को लेकर है। एयर फोर्स का कहना है कि फाइटर स्क्वाड्रन्स पर सेंट्रलाइज्ड कंट्रोल होना चाहिए। अगर इन्हें अलग-अलग भौगोलिक थिएटर कमांड्स में परमानेंटली बांट दिया गया, तो संकट के समय रिसोर्सेज को तुरंत शिफ्ट करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि एयर फोर्स अब 'नेटवर्क्ड सेंसर्स', 'एरियल रिफ्यूलिंग' और 'लॉन्ग-रेंज वेपन्स' पर ज्यादा ध्यान दे रही है।
डिफेंस स्टॉक्स पर असर
इस पूरे बदलाव का सीधा असर भारतीय डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों पर पड़ेगा। अगर सरकार IAF के सेंट्रलाइज्ड और डिजिटल मॉडल पर आगे बढ़ती है, तो Bharat Electronics Ltd (BEL) जैसी कंपनियों को बड़ा फायदा हो सकता है, क्योंकि डिजिटल इंटीग्रेशन और कम्युनिकेशन सिस्टम्स की मांग बढ़ेगी। वहीं, हाई-एंड कॉम्बैट एयरक्राफ्ट की जरूरत Hindustan Aeronautics Ltd (HAL) जैसे दिग्गजों के ऑर्डर बुक्स को मजबूत रखेगी।
निवेशकों के लिए जोखिम (Risk Factor)
डिफेंस सेक्टर में निवेश करने वालों के लिए थोड़ा धैर्य रखना जरूरी है। अगर अलग-अलग सेनाओं के बीच कमांड स्ट्रक्चर को लेकर मतभेद बढ़े, तो निर्णय लेने की प्रक्रिया धीमी हो सकती है। कोई भी बड़ा डिफेंस प्रोक्योरमेंट तभी होता है जब स्ट्रैटेजिक डॉक्ट्रिन फाइनल होती है। निवेशकों को सरकार के अगले कदमों पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि इसी से यह साफ होगा कि भविष्य में डिफेंस बजट का पैसा किन कंपनियों की झोली में जाएगा।
