IAF चीफ एयर मार्शल AP Singh ने पाकिस्तान के 5th-जनरेशन फाइटर जेट्स को लेकर चिंता जताई है। भारत की स्क्वाड्रन क्षमता अभी **29** है, जबकि जरूरत **42** की है। ऐसे में Hindustan Aeronautics Ltd (HAL) पर हर साल **36 से 40** नए विमान बनाने का भारी दबाव बढ़ गया है।
इंडियन एयर फोर्स (IAF) चीफ एयर मार्शल AP Singh ने हाल ही में क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों को लेकर गंभीर संकेत दिए हैं। पाकिस्तान द्वारा चीन की मदद से 5th-जनरेशन फाइटर जेट्स हासिल करने की कोशिशों ने देश की डिफेंस रणनीति को और तेज कर दिया है। हालांकि भारतीय वायुसेना के पास इन खतरों से निपटने की तकनीकी क्षमता है, लेकिन फ्लीट आधुनिकीकरण (Modernization) की रफ्तार बढ़ाना अब समय की मांग बन गया है।
प्रोडक्शन पर बढ़ा दबाव
फिलहाल भारतीय वायुसेना के पास 29 फाइटर स्क्वाड्रन हैं, जो स्वीकृत 42 की संख्या से काफी कम है। इस अंतर को भरने के लिए IAF को सालाना 36 से 40 नए फाइटर जेट्स की जरूरत है। यह मांग मुख्य रूप से Hindustan Aeronautics Limited (HAL) के लिए एक बड़ी चुनौती है। निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि HAL सप्लाई चेन की बाधाओं को दूर कर कैसे डिलीवरी टाइमलाइन को पूरा करती है। इंजन और अन्य क्रिटिकल सब-सिस्टम्स की सप्लाई में देरी किसी भी डिफेंस कंपनी के वैल्यूएशन के लिए रिस्क हो सकती है।
आने वाले बड़े ट्रिगर्स
डिफेंस सेक्टर के लिए अब दो बड़े प्रोजेक्ट्स पर सबकी निगाहें हैं:
- MRFA डील: 114 जेट्स की यह मेगा डील इसी फाइनेंशियल ईयर में फाइनल होने की उम्मीद है।
- AMCA प्रोग्राम: भारत अपना स्वदेशी एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट प्रोग्राम तेजी से आगे बढ़ा रहा है।
निवेशकों को अब कंपनी की ओर से आने वाले डिलीवरी रिपोर्ट्स पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि यही तय करेगा कि क्या कंपनियां वाकई IAF के सालाना टारगेट को पूरा करने में सक्षम हैं या नहीं।
