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HAL Tejas: उड़ान फिर शुरू, पर इंजन की किल्लत से डिलीवरी में देरी! शेयर क्यों गिरा?

AEROSPACE-DEFENSE
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AuthorAditi Chauhan|Published at:
HAL Tejas: उड़ान फिर शुरू, पर इंजन की किल्लत से डिलीवरी में देरी! शेयर क्यों गिरा?
Overview

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) का Tejas Mk1A फाइटर जेट अगले हफ्ते से एक बार फिर उड़ान भरेगा। कंपनी ने विमान के ब्रेक सॉफ्टवेयर से जुड़ी दिक्कत को ठीक कर लिया है। हालांकि, इस सकारात्मक खबर के बावजूद HAL के शेयर गिरे हैं, क्योंकि निवेशक इस बात को लेकर चिंतित हैं कि इंजन की कमी और प्रोडक्शन में देरी के चलते कंपनी समय पर डिलीवरी कैसे पूरी करेगी।

Tejas Mk1A की उड़ान फिर शुरू, लेकिन प्रोडक्शन में बड़ी अड़चनें

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) का Tejas Mk1A फाइटर जेट प्रोग्राम अगले हफ्ते से फिर से टेस्ट फ्लाइट्स शुरू करेगा। कंपनी के चेयरमैन डी. के. सुनील ने इस बात की पुष्टि की है कि विमान के ब्रेक सॉफ्टवेयर से जुड़ी तकनीकी समस्या को सुलझा लिया गया है और लोकल मॉडिफिकेशन कमेटी ने इसे हरी झंडी दे दी है। इससे फाइटर जेट के टेस्ट और डेवलपमेंट का काम फिर से आगे बढ़ पाएगा।

इंजन की भारी कमी, डिलीवरी में हो रही देरी

लेकिन यहां एक बड़ी रुकावट बनी हुई है - जनरल इलेक्ट्रिक (General Electric) के F404-IN20 इंजन की सप्लाई। HAL को 2026 की दूसरी छमाही में कुल 20 इंजन मिलने की उम्मीद है। यह संख्या ऑर्डर किए गए 83 Tejas Mk1A विमानों के लिए बहुत कम है। 2026 की शुरुआत की रिपोर्ट्स के मुताबिक, HAL को कॉन्ट्रैक्ट के तहत कुल 99 इंजनों में से कुछ ही इंजन मिले थे, जिसके चलते कई तैयार एयरफ्रेम ग्राउंडेड पड़े हैं। इंजन की यह कमी Tejas Mk1A प्रोग्राम के लिए HAL की डिलीवरी कमिटमेंट को पूरा करने की क्षमता पर सीधा असर डाल रही है, जो वैसे भी शेड्यूल से दो साल से ज्यादा लेट चल रहा है।

उड़ान शुरू होने के बावजूद बाजार की चिंता बरकरार

फ्लाइट्स के फिर से शुरू होने की खबर के बावजूद, HAL के शेयर पिछले एक महीने में 8% तक गिरे हैं, जो निवेशकों की सावधानी को दिखाता है। यह अच्छी खबर के विपरीत है और निवेशकों की HAL की एग्जीक्यूशन क्षमता (execution capability) और लगातार हो रही देरी को लेकर चिंताओं को उजागर करता है। HAL ने फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) में ₹32,250 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया, जो 4% बढ़ा है, लेकिन 8-10% के गाइडेंस से काफी कम है। इसकी मुख्य वजह LCA Mk1A और HTT-40 प्रोग्राम में हुई देरी है। HAL के पास ₹2.54 लाख करोड़ का बड़ा ऑर्डर बुक है, जो अगले 7-8 साल तक के रेवेन्यू की विजिबिलिटी देता है, लेकिन इस बैकलॉग को समय पर डिलीवरी में बदलना बहुत ज़रूरी है।

पिछली घटनाएं सुरक्षा पर सवाल उठाती हैं

Tejas प्रोग्राम पिछले कुछ हादसों के बाद जांच के दायरे में रहा है। फरवरी 2026 में एक रनवे एक्सकर्शन (runway excursion) को सॉफ्टवेयर ग्लिच से जोड़ा गया था, और नवंबर 2025 में दुबई में एक एयरशो में एक घातक दुर्घटना हुई थी। इन घटनाओं के साथ, फरवरी 2026 में एक और रनवे ओवरशूट (runway overshoot) ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी और शेयर गिराए, जिससे विमान की सुरक्षा रिकॉर्ड और HAL के रखरखाव पर सवाल उठे। HAL का कहना है कि Tejas का सुरक्षा रिकॉर्ड मजबूत है, लेकिन ये लगातार होने वाली घटनाएं प्रोग्राम की विश्वसनीयता को लेकर चिंताओं में इजाफा करती हैं।

डिलीवरी की समस्याओं से वैल्यूएशन पर दबाव

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) का मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Capitalization) लगभग ₹2.45 लाख करोड़ है, जो इसे रेवेन्यू के हिसाब से भारत का सबसे बड़ा डिफेंस मैन्युफैक्चरर बनाता है। इसका ट्रेलिंग प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेशियो लगभग 27-34 है। यह लगातार प्रोडक्शन और डिलीवरी की चुनौतियों को देखते हुए थोड़ा ज्यादा लगता है। इसके कॉम्पिटीटर्स जैसे भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (Bharat Electronics) का P/E रेशियो लगभग 51 है, जबकि भारत डायनामिक्स (Bharat Dynamics) और डेटा पैटर्न्स (Data Patterns) का P/E रेशियो 70 से ऊपर है। यह वैल्यूएशन मजबूत ग्रोथ की उम्मीदें दिखाता है, जो तब तक हासिल करना मुश्किल हो सकता है जब तक इंजन सप्लाई की समस्या और प्रोडक्शन की रुकावटें जल्दी ठीक न हो जाएं। HAL प्रोडक्शन कैपेसिटी बढ़ा रहा है, जिसमें एक तीसरी LCA Tejas प्रोडक्शन लाइन भी शामिल है, जिसका लक्ष्य हर साल 24 फाइटर जेट बनाना है। हालांकि, इस रफ्तार से भी मौजूदा ऑर्डर पूरे करने में करीब आठ साल लग जाएंगे।

भविष्य प्रोडक्शन में तेजी लाने पर निर्भर

Tejas Mark 1A की एक क्रिटिकल रिव्यू मई में होनी है, जो इंडियन एयर फोर्स के लिए इसके इंडक्शन (induction) टाइमलाइन को तय करेगी। इस रिव्यू को सफलतापूर्वक पूरा करना और डिलीवरी शुरू करना HAL की तैयारियों को पक्का करने के लिए महत्वपूर्ण है। एनालिस्ट्स (Analysts) आम तौर पर बड़े ऑर्डर बुक और भारत के डिफेंस के लिए प्रोग्राम की स्ट्रेटेजिक अहमियत के चलते लॉन्ग-टर्म व्यू (long-term view) को पॉजिटिव रखते हैं। हालांकि, मार्केट मौजूदा स्टॉक प्राइस को सही ठहराने के लिए इंजन खरीद की प्रगति और तेज प्रोडक्शन पर करीब से नजर रखेगा।

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