HAL के शेयर में भारी गिरावट: GE इंजन की सप्लाई चेन और डिलेवरी की चिंताओं से निवेशक परेशान

AEROSPACE-DEFENSE
Whalesbook Logo
AuthorMehul Desai|Published at:
HAL के शेयर में भारी गिरावट: GE इंजन की सप्लाई चेन और डिलेवरी की चिंताओं से निवेशक परेशान
Overview

आज शेयर बाजार में Hindustan Aeronautics Ltd (HAL) के शेयरों में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखा गया। शुरुआती कारोबार में शेयर **6%** से ज़्यादा गिरे, लेकिन बाद में कुछ रिकवरी दिखाई। इस गिरावट की मुख्य वजह लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) Mk1A की डिलेवरी में संभावित देरी की रिपोर्टें थीं। हालांकि HAL ने सफाई दी है कि 5 प्लेन तैयार हैं, लेकिन GE इंजन की सप्लाई चेन और डिफेंस सेक्टर की सुस्ती को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।

सप्लाई चेन की गड़बड़ाहट से शेयरों में उथल-पुथल

5 फरवरी 2026 को शेयर बाजार में Hindustan Aeronautics Ltd (HAL) के शेयरों में खासी उठापटक मची रही। शुरुआती ट्रेड में स्टॉक 6.29% तक लुढ़क कर ₹3,952 के निचले स्तर पर पहुंच गया। यह पिछले दो दिनों में लगभग 12% की गिरावट को और बढ़ा रहा था। दरअसल, ऐसी खबरें आईं कि स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) Mk1A की डिलेवरी में देरी हो सकती है, और यह मई के बाद खिसक सकती है। HAL ने अपने ऑफिशियल X हैंडल से स्पष्ट किया कि 5 विमान कॉन्ट्रैक्ट के अनुसार पूरी तरह तैयार हैं और 9 अतिरिक्त विमान बन चुके हैं और उन्होंने उड़ान भी भरी है। लेकिन, शुरुआती प्रतिक्रिया से यह संकेत मिला कि निवेशक कंपनी की प्रोडक्शन टाइमलाइन को लेकर चिंतित हैं। दोपहर तक, शेयर अपनी शुरुआती गिरावट से उबरकर 3.81% नीचे ₹4,056.50 पर ट्रेड कर रहे थे। यह पिछली क्लोजिंग (0.87% की गिरावट) और उससे पहले की गिरावट (5.25%) के बाद थोड़ी राहत की बात थी, पर सेंटीमेंट पूरी तरह नहीं बदला। यह उथल-पुथल दिखाती है कि निवेशक डिलेवरी शेड्यूल और सप्लायर की विश्वसनीयता को कितना महत्व देते हैं, खासकर HAL के बड़े ऑर्डर बुक को देखते हुए।

GE इंजन पर निर्भरता: एक बड़ा अड़चन

शेयरधारकों की चिंता का एक बड़ा कारण HAL का विदेशी इंजन सप्लायर्स पर निर्भर होना है, खासकर General Electric (GE) पर। कंपनी के मैनेजमेंट ने बताया कि उन्हें GE से 5 इंजन मिल चुके हैं और आगे की सप्लाई भी योजनाओं के मुताबिक होने की उम्मीद है। लेकिन, ताज़ा रिपोर्ट्स बताती हैं कि GE का खुद का इंजन प्रोडक्शन, जिसमें CFM International Leap टर्बोफैन जैसे ज़रूरी इंजन शामिल हैं, 2025 में सप्लाई चेन की दिक्कतों और कच्चे माल की कमी के चलते मुश्किलों में रहा। खास तौर पर, Tejas Mk1A प्रोग्राम के लिए GE F404 इंजन की डिलेवरी में काफी देरी देखी गई है। 2025 में 99 के ऑर्डर के मुकाबले सिर्फ 3 इंजन डिलीवर हुए। वहीं, 97 विमानों के लिए 113 इंजन का एक और ऑर्डर 2027-2032 के बीच डिलीवर होना है। GE की इंजन सप्लाई चेन की ये कमज़ोरियां HAL के प्रोडक्शन टारगेट और कॉन्ट्रैक्ट पूरा करने की क्षमता के लिए एक बड़ा खतरा पैदा करती हैं। इसका असर भविष्य के ऑर्डर बुक पर भी पड़ सकता है, जैसे कि AMCA फाइटर जेट प्रोग्राम के बिडर्स से HAL के बाहर होने की खबरें।

डिफेंस सेक्टर की सुस्ती और वैल्यूएशन पर सवाल

HAL का परफॉरमेंस भारतीय डिफेंस सेक्टर में बढ़ी हुई उथल-पुथल के बीच भी हो रहा है। Nifty India Defence इंडेक्स पिछले एक साल में 5,025.35 से 9,195.15 के बीच घूमता रहा है। 5 फरवरी 2026 को यह इंडेक्स 0.77% गिरकर 7,972.65 पर था। 2 फरवरी को आए ब्रॉडर मार्केट करेक्शन के बाद 18 में से 16 डिफेंस स्टॉक्स गिरे थे। इससे पता चलता है कि बजट आवंटन और मैक्रोइकॉनॉमिक फैक्टर डिफेंस सेक्टर के सेंटीमेंट को काफी प्रभावित करते हैं। HAL के वैल्यूएशन (Valuation) पर भी सवाल उठ रहे हैं। फरवरी 2026 की शुरुआत में, HAL का P/E रेश्यो (Price-to-Earnings Ratio) करीब 33.3x से 37.28x के बीच था, और मार्केट कैप (Market Cap) लगभग ₹2.99 ट्रिलियन यानी करीब ₹282,029 करोड़ था। वहीं, Bharat Dynamics Ltd (BDL) का PE रेश्यो (Price-to-Earnings Ratio) लगभग 80.1x से 97.0x और मार्केट कैप (Market Cap) करीब ₹46,000-50,000 करोड़ है। Bharat Electronics Ltd (BEL) का मार्केट कैप (Market Cap) लगभग ₹3.15-3.21 ट्रिलियन और PE रेश्यो (Price-to-Earnings Ratio) 52.8x से 72.4x है। HAL का बड़ा मार्केट कैप, सप्लाई चेन की दिक्कतें और AMCA जैसे प्रोजेक्ट्स से बाहर होना, इसके वैल्यूएशन (Valuation) की स्थिरता पर सवाल खड़े करता है।

एनालिस्ट्स का मिला-जुला नज़रिया और आगे की राह

एनालिस्ट्स (Analysts) का HAL पर नज़रिया मिला-जुला है। कुछ रिपोर्ट्स में Morgan Stanley द्वारा स्टॉक को डाउनग्रेड (downgrade) करने की बात कही गई है, लेकिन 25 में से 21 एनालिस्ट अभी भी 'बाय' (Buy) की सलाह दे रहे हैं। हालांकि, Geojit Investments ने 'वैल्यूएशन मॉडरेशन' (valuation moderation) और इंजन डिलेवरी की दिक्कत को 'नियर-टर्म हेडविंड' (near-term headwind) बताते हुए धीरे-धीरे निवेश की सलाह दी है। यह सतर्क नज़रिया स्टॉक के पैटर्न से भी मेल खाता है, जो लॉन्ग-टर्म अपट्रेंड (uptrend) में 'रिट्रेसमेंट फेज' (retracement phase) से गुजर रहा है। कंपनी का पूरे फाइनेंशियल ईयर (Financial Year) के गाइडेंस को पूरा करना इस बात पर निर्भर करेगा कि सप्लाई चेन की दिक्कतें कितनी जल्दी दूर होती हैं और ऑर्डर बुक का एग्जीक्यूशन कितना मजबूत रहता है। AMCA प्रोग्राम से बाहर होना और डिलेवरी टाइमलाइन की चिंताएं नज़दीकी भविष्य में स्टॉक के लिए बड़ी चुनौतियां बनी रहेंगी।

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.