मुनाफे के बावजूद शेयर गिरे, जानें कारण
HAL के शेयर 4% गिरकर ₹4,427.00 पर आ गए, जबकि कंपनी ने मार्च तिमाही में 5.5% की ग्रोथ के साथ ₹4,196 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया। यह प्रॉफिट काफी हद तक 76.6% की भारी उछाल के साथ ₹1,151 करोड़ तक पहुंची 'अन्य आय' (Other Income) की वजह से बढ़ा है। लेकिन, कोर बिजनेस की बात करें तो ग्रॉस मार्जिन में बड़ी गिरावट आई है। यह पिछले साल के 63.7% से घटकर 54% रह गया है, जो बढ़ते इनपुट कॉस्ट और कंपनी के मुख्य बिजनेस पर दबाव का साफ संकेत है।
Tejas Mk1A प्रोग्राम में लंबा खिंचता इंतजार
निवेशकों की चिंता का मुख्य कारण Tejas Mk1A फाइटर जेट प्रोग्राम में हो रही लगातार देरी है। रिपोर्टों के मुताबिक, इंडियन एयरफोर्स (IAF) और HAL के बीच एक अहम रिव्यू मीटिंग स्थगित कर दी गई है क्योंकि HAL तकनीकी और सर्टिफिकेशन से जुड़े जरूरी प्रोग्रेस रिपोर्ट जमा नहीं कर पाया।
समस्याओं को और बढ़ा रही है GE Aerospace की ओर से F404 इंजन की सप्लाई में दिक्कत। HAL ने 83 Tejas Mk1A एयरक्राफ्ट के लिए 99 इंजन का ऑर्डर दिया था, लेकिन अप्रैल 2026 तक सिर्फ छह ही डिलीवर हुए हैं, जिसमें पहला मार्च 2025 में मिला। इस देरी के कारण HAL, GE पर कॉन्ट्रैक्टुअल पेनल्टी लगाने पर भी विचार कर रहा है। इंजन की कमी, रडार डेवलपमेंट और मिसाइल इंटीग्रेशन में देरी के चलते, जो डिलीवरी मार्च 2024 तक होनी थी, अब 2026 के मध्य या उसके बाद ही संभव है। पूरी फ्लीट की डिलीवरी 2031 तक खिंच सकती है।
वैल्यूएशन पर सवाल, एग्जीक्यूशन की चिंता
HAL का शेयर फिलहाल करीब 33-35 के प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो पर ट्रेड कर रहा है, और इसकी मार्केट कैप लगभग ₹3.08 लाख करोड़ है। हालांकि डिफेंस सेक्टर में सरकारी फोकस और खर्च बढ़ने से ग्रोथ दिख रही है, लेकिन HAL का P/E इंडस्ट्री के औसत 21.13 के मुकाबले काफी ज्यादा है। कंपनी का रिटर्न ऑन इक्विटी 26.04% है और ऑर्डर बुक ₹2.54 लाख करोड़ से ज्यादा है, जो मजबूत रेवेन्यू की उम्मीद जगाता है। लेकिन, यह बड़ा ऑर्डर तभी पूरा हो पाएगा जब HAL अपनी डिलीवरी समय पर कर पाए।
सैन्य अफसरों की खरी-खोटी
HAL की प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करने की क्षमता पर वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने भी सवाल उठाए हैं। एयरफोर्स चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने हाल ही में डिफेंस प्रोक्योरमेंट सिस्टम की आलोचना करते हुए कहा था, "मैं किसी ऐसे प्रोजेक्ट के बारे में नहीं सोच सकता जो समय पर पूरा हुआ हो।" उन्होंने अवास्तविक समय-सीमा वाले कॉन्ट्रैक्ट पर सवाल उठाते हुए कहा, "हम अक्सर कॉन्ट्रैक्ट साइन करते समय जानते हैं कि ये सिस्टम समय पर नहीं आएंगे।" ये टिप्पणियां HAL जैसी डिफेंस पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (DPSUs) में सिस्टमैटिक खामियों को उजागर करती हैं। Tejas Mk1A में देरी, विदेशी इंजनों पर निर्भरता और सॉफ्टवेयर इंटीग्रेशन की दिक्कतें साफ दिखाती हैं कि HAL अपने कांट्रैक्टुअल दायित्वों को पूरा करने में संघर्ष कर रहा है।
एनालिस्ट्स की राय बंटी हुई
एनालिस्ट्स HAL के भविष्य को लेकर बंटे हुए हैं। JM Financial ने मार्जिन में कमजोरी और एग्जीक्यूशन मुद्दों का हवाला दिया है। वहीं, Nomura ने मजबूत ऑर्डर बुक और रेवेन्यू आउटलुक को देखते हुए 'Buy' रेटिंग और ₹5,954 का टारगेट बनाए रखा है। Goldman Sachs 'Neutral' स्टैंस पर है, जो एग्जीक्यूशन और मार्जिन दबाव को अहम मान रहा है। Antique Stock Broking का मानना है कि फाइनेंशियल ईयर 27 एक टर्निंग पॉइंट हो सकता है, जो Tejas Mk1A के लिए इंजन सप्लाई सुधरने पर निर्भर करेगा। कुल मिलाकर, HAL का नेट प्रॉफिट और रेवेन्यू बढ़ा है, लेकिन एग्जीक्यूशन की समस्याएं, खासकर Tejas Mk1A को लेकर, इसके भविष्य और वैल्यूएशन पर भारी पड़ रही हैं।