Hindustan Aeronautics Limited (HAL) को GE Aerospace से 3 नए F404-IN20 इंजन मिले हैं, जिससे कुल संख्या **10** हो गई है। राहत के बावजूद, Tejas Mk1A प्रोग्राम अभी भी देरी से चल रहा है और **30** एयरफ्रेम असेंबली के इंतजार में हैं। निवेशक इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि सप्लाई की यह बाधा कैसे **₹48,000 करोड़** के कॉन्ट्रैक्ट और **30-31%** के ऑपरेटिंग मार्जिन को प्रभावित करती है।
इंजन की खेप और प्रोडक्शन की चुनौती
HAL के लिए इंजन की यह नई खेप एक राहत तो है, लेकिन यह उस बड़ी समस्या को भी उजागर करती है जो पिछले 2 सालों से बनी हुई है। फिलहाल कंपनी के पास 30 ऐसे एयरफ्रेम तैयार खड़े हैं, जो बिना इन इंजनों के अधूरे हैं। यह पूरा प्रोजेक्ट ₹48,000 करोड़ के उस कॉन्ट्रैक्ट का हिस्सा है, जिस पर 2021 में हस्ताक्षर किए गए थे। देरी के असर को देखते हुए HAL ने GE Aerospace पर पेनल्टी क्लॉज भी लगाए हैं, जो प्रोग्राम पर बढ़ते दबाव को दिखाते हैं।
फाइनेंशियल हेल्थ और निवेशकों के लिए संकेत
ऑपरेशनल चुनौतियों के बावजूद, HAL के फाइनेंशियल आंकड़े मजबूत हैं। कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में 14.9% की सालाना प्रॉफिट ग्रोथ के साथ ₹1,589.68 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया है। वहीं, रेवेन्यू में भी 14.4% का उछाल आया है। मैनेजमेंट ने मौजूदा फाइनेंशियल ईयर के लिए 10-12% रेवेन्यू ग्रोथ और 30-31% ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन का लक्ष्य रखा है।
आगे की राह
एक ही सप्लायर पर निर्भरता कंपनी की सबसे बड़ी कमजोरी बनी हुई है। निवेशकों को अब इस पर ध्यान देना चाहिए कि इंजनों की सप्लाई में निरंतरता कितनी आती है। आने वाले समय में कंपनी के एक्सचेंज फाइलिंग्स और मैनेजमेंट की कमेंट्री यह तय करेगी कि क्या वे अपने ऑर्डर बुक को समय पर रेवेन्यू में बदल पाएंगे या सप्लाई चेन की बाधाएं मुनाफे की रफ्तार को धीमा करेंगी।
