रक्षा क्षेत्र में आया बड़ा बदलाव
यह फैसला दशकों से चले आ रहे सरकारी कंपनियों के दबदबे को चुनौती देता है। एडवांस्ड मल्टीरोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) प्रोजेक्ट के लिए अब सरकारी के साथ-साथ प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों को भी मौका दिया जाएगा। ADA का यह कदम HAL की पुरानी डिलीवरी की दिक्कतों और बड़े ऑर्डर बुक के कारण उठाया गया है, ताकि प्रोजेक्ट में प्राइवेट सेक्टर की फुर्ती और प्रतिस्पर्धा लाई जा सके।
बदली हुई रणनीति: प्राइवेट कंपनियों को मिला मौका
भारतीय सरकार ने AMCA प्रोजेक्ट के लिए एक नई एग्जीक्यूशन (Execution) मॉडल तैयार की है। अब कोई भी पब्लिक या प्राइवेट सेक्टर की कंपनी अकेले बोली लगा सकती है, ज्वाइंट वेंचर (Joint Venture) बना सकती है या कंसोर्टियम (Consortium) में शामिल हो सकती है। इसे HAL के लिए एक बड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा है। एनालिस्ट्स का मानना है कि HAL की तेजस (Tejas) फाइटर जेट की डिलीवरी में देरी और जनरल इलेक्ट्रिक (GE) से इंजन सप्लाई में हो रही दिक्कतें इस बदलाव का मुख्य कारण बनी हैं। HAL के इस रेस से बाहर होने के बाद, ADA अब तीन शॉर्टलिस्टेड प्राइवेट कंसोर्टियम में से किसी एक के साथ मिलकर 5 AMCA प्रोटोटाइप का निर्माण करेगी, जिसकी लागत लगभग ₹15,000 करोड़ बताई जा रही है। अगर यह प्रोजेक्ट सफल रहा, तो 114 एयरक्राफ्ट का ऑर्डर मिल सकता है, जिसकी कीमत ₹3.25 लाख करोड़ तक हो सकती है।
अब प्राइवेट सेक्टर संभालेगा कमान
इस प्रोजेक्ट में प्रमुख भारतीय कॉर्पोरेट कंपनियां आगे आ रही हैं। Tata Advanced Systems Limited, Larsen & Toubro (L&T) का Bharat Electronics Limited (BEL) के साथ पार्टनरशिप वाला कंसोर्टियम, और Bharat Forge, BEML, व Data Patterns का ग्रुप प्रमुख दावेदार हैं। Adani Defence & Aerospace और ICOMM Tele के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम भी इस दौड़ में शामिल थे। फाइटर जेट के फुल-स्केल प्रोडक्शन के लिए प्राइवेट सेक्टर को यह मौका पहली बार मिल रहा है। इसका मकसद उनकी टेक्नोलॉजी को जल्दी अपनाने की क्षमता, प्रोडक्शन की डेडलाइन पूरी करने और कड़े क्वालिटी कंट्रोल को बेहतर ढंग से मैनेज करना है। हालांकि, फाइटर जेट के प्रोडक्शन में प्राइवेट सेक्टर के अनुभव को लेकर कुछ चिंताएं हैं, लेकिन उनकी लागत नियंत्रण (Cost Control) और एफिशिएंसी (Efficiency) पर फोकस पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (PSUs) के मुकाबले बेहतर साबित हो सकता है।
HAL के लिए एक वेक-अप कॉल
HAL के लिए यह डिसक्वालिफिकेशन (Disqualification) एक बड़ा झटका है। एक समय पर भारतीय शेयर बाजार का 'दार्लिंग' रही HAL की मार्केट कैप पिछले 5 सालों में 1000 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ी थी। तेजस के विभिन्न वेरिएंट्स के बड़े ऑर्डर बुक के बावजूद, कंपनी को एयरफोर्स चीफ से भी डिलीवरी में देरी को लेकर फटकार झेलनी पड़ी है। ट्रेनर्स और LCA Mk-1A फाइटर की प्रोडक्शन लाइन्स में व्यस्तता, साथ ही तेजस Mk2 का डेवलपमेंट, HAL की कैपेसिटी की कमी को दर्शाता है, जो संभवतः इस फैसले का एक अहम कारण बना। HAL के चेयरमैन ने संकेत दिया है कि कंपनी बाद के फेजेस में बड़े स्केल पर प्रोडक्शन के लिए बिड करेगी। फिलहाल, कंपनी को ऑटोमेशन (Automation) बढ़ाना होगा, मैन्युअल लेबर पर निर्भरता कम करनी होगी और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट को मजबूत करना होगा, ताकि वे इस कॉम्पिटिटिव डिफेंस इकोसिस्टम में टिक सकें। HAL ने GE से इंजन सप्लाई मिलते ही पहली खेप के तेजस Mk1A एयरक्राफ्ट की डिलीवरी के लिए अपनी तैयारियों की पुष्टि की है।