कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी जल्द ही HAL के इंडियन मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर (IMRH) प्रोग्राम के लिए ₹13,500 करोड़ के निवेश को मंजूरी दे सकती है। इस प्रोजेक्ट का मकसद रूसी Mi-17 हेलीकॉप्टरों की पुरानी फ्लीट को स्वदेशी तकनीक से बदलना है।
भारत सरकार एयरोस्पेस सेक्टर में एक बड़े निवेश को हरी झंडी देने की तैयारी में है। कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) से हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के इंडियन मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर (IMRH) प्रोजेक्ट के लिए ₹13,500 करोड़ के फंड को मंजूरी मिलने की पूरी उम्मीद है। यह कदम भारतीय सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के लिए उठाया जा रहा है, ताकि 240 से ज्यादा पुराने रूसी Mi-17 हेलीकॉप्टरों को नई स्वदेशी ताकत दी जा सके।
अरावली इंजन का दम
इस पूरे प्रोजेक्ट का सबसे अहम हिस्सा 'अरावली' टर्बोशाफ्ट इंजन है। अगस्त 2026 में HAL और Safran Helicopter Engines ने अपने जॉइंट वेंचर SAFHAL के जरिए इस इंजन को मिलकर बनाने का कॉन्ट्रैक्ट साइन किया है। यह इंजन IMRH और नेवल वेरिएंट (Deck-Based Multi-Role Helicopter) दोनों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। निवेशकों के लिए यह एक संकेत है कि HAL अब सिर्फ लाइसेंस-आधारित मैन्युफैक्चरिंग नहीं, बल्कि एडवांस इंजन टेक्नोलॉजी के को-डेवलपमेंट की ओर बढ़ रही है।
ऑर्डर बुक और चुनौतियां
मई 2026 तक HAL की ऑर्डर बुक ₹2,54,538 करोड़ के भारी-भरकम स्तर पर थी, जो कंपनी के लिए अगले कई सालों तक कमाई की स्पष्ट तस्वीर पेश करती है। हालांकि, इतने बड़े डिफेंस प्रोजेक्ट्स में डिजाइन, सर्टिफिकेशन और टेस्टिंग में देरी का रिस्क हमेशा बना रहता है, जिससे कॉस्ट बढ़ सकती है। इसके अलावा, भारी R&D खर्च और प्राइवेट सेक्टर से बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बने रहने की संभावना है।
1 सितंबर 2026 को HAL का शेयर ₹4,807.60 पर बंद हुआ था। अब निवेशकों की नजरें सरकारी ऐलान और प्रोजेक्ट की डेडलाइन्स पर टिकी हैं। कंपनी कितनी कुशलता से डिलीवरी शेड्यूल और टेक्निकल कॉम्प्लेक्सिटीज को मैनेज करती है, यही HAL के भविष्य के प्रदर्शन की दिशा तय करेगा।
