रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने Tejas LCA Mk-1A फाइटर जेट की डिलीवरी में लगातार देरी को लेकर Hindustan Aeronautics Limited (HAL) को सार्वजनिक रूप से घेरा है। **₹46,000 करोड़** के इस प्रोजेक्ट में इंजन सप्लाई की समस्या और एग्जीक्यूशन बाधाओं ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
सरकारी दबाव और बढ़ती स्क्रूटनी के बीच Hindustan Aeronautics Limited (HAL) मुश्किलों में घिरी नजर आ रही है। हाल ही में बेंगलुरु में आयोजित एक कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने Tejas LCA Mk-1A के डिलीवरी टाइमलाइन को लेकर कंपनी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। 2021 में हस्ताक्षरित यह ₹46,000 करोड़ का प्रोजेक्ट 83 फाइटर जेट्स के उत्पादन से जुड़ा है, जिसकी शुरुआती डेडलाइन मार्च 2024 थी, लेकिन कंपनी अब तक इसे पूरा नहीं कर पाई है।
निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?
शेयरहोल्डर्स के लिए यह सिर्फ एक ऑपरेशनल देरी नहीं, बल्कि रेवेन्यू रिकग्निशन और ऑर्डर बुक एग्जीक्यूशन पर बड़ा असर है। जब प्रोडक्शन की रफ्तार धीमी होती है, तो कंपनी के कॉस्ट ओवररन्स बढ़ते हैं और मार्केट में इसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं।
सप्लाई चेन का अड़ंगा
इस देरी के पीछे सबसे बड़ी वजह GE Aerospace के F404 इंजन की सप्लाई में कमी बताई जा रही है। HAL के मुताबिक, उन्हें अब तक 10 इंजन मिल चुके हैं और साल के अंत तक 12 और इंजन मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा सॉफ्टवेयर इंटीग्रेशन की चुनौतियों ने भी एयरफोर्स की नाराजगी बढ़ाई है।
भविष्य के संकेत
कंपनी के पास ऑर्डर बुक तो मजबूत है, लेकिन फाइनेंशियल परफॉर्मेंस प्रोजेक्ट के समय पर पूरा होने पर टिकी है। किसी भी तरह की देरी से न केवल भविष्य के ऑर्डर पर असर पड़ सकता है, बल्कि वर्किंग कैपिटल पर भी बोझ बढ़ता है। अब निवेशकों की नजर आने वाली तिमाहियों में डिलीवरी रेट पर रहेगी, क्योंकि सरकार ने अब पूरी तरह 'आउटपुट-ड्रिवन' मॉडल की मांग की है, जिससे कंपनी पर काम की रफ्तार बढ़ाने का दबाव और ज्यादा बढ़ गया है।
