सरकार अग्निपथ स्कीम के तहत भर्ती हुए पहले बैच के अग्निवीरों की सर्विस अवधि बढ़ाने पर गंभीरता से विचार कर रही है। इंडियन नेवी के पहले बैच का कार्यकाल 21 नवंबर, 2026 को समाप्त हो रहा है, जिसे देखते हुए अधिकारियों ने मौजूदा **25 प्रतिशत** रिटेंशन सीमा से अधिक जवानों को रखने की संभावनाओं को रिव्यू करना शुरू कर दिया है।
केंद्र सरकार अब अग्निपथ स्कीम के तहत भर्ती हुए पहले बैच के भविष्य को लेकर उच्च-स्तरीय चर्चा कर रही है। साल 2022 में जब यह स्कीम शुरू की गई थी, तब 4 साल का कार्यकाल और अधिकतम 25 प्रतिशत जवानों को ही परमानेंट करने का नियम तय किया गया था। अब जबकि पहला बैच अपनी सर्विस पूरा करने के करीब है, तो नीति निर्माता इस बात का आकलन कर रहे हैं कि क्या अधिक संख्या में प्रशिक्षित जवानों को बरकरार रखा जाना चाहिए।
महत्वपूर्ण तारीखें और संख्या
ट्रांजिशन का समय बेहद नजदीक है। इंडियन नेवी का पहला बैच 21 नवंबर, 2026 को अपनी सेवा पूरी करेगा, इसके बाद इंडियन एयर फोर्स का बैच 21 दिसंबर, 2026 और इंडियन आर्मी का बैच 31 दिसंबर, 2026 को सेवामुक्त होगा। मौजूदा नियमों के तहत इस साल के अंत तक लगभग 18,300 जवानों के बाहर होने की उम्मीद है। सरकार का यह रिव्यू ऑपरेशनल निरंतरता बनाए रखने के उद्देश्य से किया जा रहा है।
डिफेंस बजट और निवेशकों के लिए मायने
रणनीतिक नजरिए से सेना को युवा और तकनीक में माहिर फोर्स की जरूरत है, लेकिन साथ ही उन जवानों के अनुभव की भी आवश्यकता है जिन्होंने पिछले 4 सालों में विशेष ट्रेनिंग ली है। हालांकि अग्निपथ स्कीम का मुख्य मकसद डिफेंस बजट पर पेंशन के बोझ को कम करना था, लेकिन यदि रिटेंशन बढ़ाया जाता है, तो इसके फिस्कल इंपैक्ट में बदलाव आ सकता है।
डिफेंस सेक्टर पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए यह घटनाक्रम अहम है। सरकार ने पहले ही इन जवानों को सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेस (CAPFs) और स्टेट पुलिस में खपाने की पहल की है। बाजार की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार नेवी की ट्रांजिशन डेट से पहले कोई औपचारिक पॉलिसी बदलाव की घोषणा करती है या नहीं।
