Genrobotics ने अब स्वच्छता से हटकर डिफेंस सेक्टर में कदम रखा है। कंपनी ने भारतीय Territorial Army के साथ हाथ मिलाया है, जिसके तहत नेशनल सिक्योरिटी और आपदा प्रबंधन के लिए खास स्वदेशी रोबोटिक तकनीक विकसित की जाएगी।
एक नई दिशा में कदम
29 अगस्त, 2026 को कोलकाता में आयोजित KYTA & TA 2.0 संगोष्ठी के दौरान Genrobotic Innovations ने भारतीय Territorial Army के साथ एक ऐतिहासिक करार पर हस्ताक्षर किए। इस पार्टनरशिप का मुख्य उद्देश्य सेना के लिए मानवीय सहायता, आपदा राहत और इंजीनियरिंग कार्यों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाना है।
सफाई से लेकर डिफेंस तक का सफर
केरल स्थित यह स्टार्टअप अपने 'Bandicoot' रोबोट के लिए मशहूर है, जो सीवर सफाई के काम आते थे। अब कंपनी तेजी से डिफेंस और एयरोस्पेस सेक्टर की ओर रुख कर रही है। इस मिशन को पूरा करने के लिए कंपनी ने थुंबा, केरल में एक विशेष प्रोडक्शन और रिसर्च फैसिलिटी भी तैयार की है।
अत्याधुनिक तकनीक का संगम
इस सहयोग के तहत कंपनी अपने G-Bot ह्यूमनाइड प्रोटोटाइप और रोबोटिक रोवर्स को सेना के हवाले करेगी। इन मशीनों का उपयोग सर्विलांस, रिमोट सेंसिंग और उन खतरनाक इलाकों में किया जाएगा जहां इंसानों की जान को खतरा होता है। कंपनी ने अपने प्रोजेक्ट्स को मजबूती देने के लिए भारतीय सेना और ISRO के अनुभवी विशेषज्ञों को भी अपनी टीम में शामिल किया है।
बिजनेस के नजरिए से चुनौतियां
हालांकि यह पहल 'मेक इन इंडिया' और स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देती है, लेकिन डिफेंस सेक्टर का बिजनेस मॉडल सामान्य कमर्शियल मार्केट से काफी अलग है। यहां लंबे प्रोक्योरमेंट साइकिल, सख्त रेगुलेटरी नियम और कड़ी सिक्योरिटी क्लियरेंस जैसी बाधाएं होती हैं। कंपनी की सफलता अब इस बात पर निर्भर करेगी कि वह अपने रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) को कितनी जल्दी फील्ड डिप्लॉयमेंट में बदल पाती है। निवेशकों और इंडस्ट्री वॉचर्स की नजरें अब थुंबा फैसिलिटी में होने वाले प्रोडक्शन और आने वाले लॉन्ग-टर्म डिफेंस कॉन्ट्रैक्ट्स पर टिकी होंगी।
