IPO लाने की तैयारी में जुटी ड्रोन निर्माता कंपनी Garuda Aerospace ने अपने चेन्नई प्लांट में Army Design Bureau के अधिकारियों की मेजबानी की। कंपनी ने डिफेंस प्रोजेक्ट्स के साथ-साथ **80,000** अग्निवीरों को ट्रेनिंग देने का प्रस्ताव भी रखा है।
डिफेंस सेक्टर में पकड़ मजबूत करने की कोशिश
हाल ही में Army Design Bureau के एडिशनल डायरेक्टर जनरल, मेजर जनरल गोपाल कपूर ने चेन्नई में Garuda Aerospace की मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी का दौरा किया। इस दौरे का मकसद कंपनी की स्वदेशी उत्पादन क्षमता—जिसमें इंडस्ट्रियल-ग्रेड 3D प्रिंटिंग, इंजेक्शन मोल्डिंग और बैटरी असेंबली लाइन शामिल हैं—का आकलन करना था। यह कदम भविष्य में सैन्य खरीद (Military Procurement) के लिए घरेलू ड्रोन टेक को परखने की एक बड़ी कवायद है।
अग्निवीरों के लिए ट्रेनिंग का प्रस्ताव
हार्डवेयर के अलावा, कंपनी डिफेंस इकोसिस्टम में अपनी भूमिका बढ़ाने के लिए ट्रेनिंग पर दांव लगा रही है। कंपनी ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के सामने 80,000 अग्निवीरों को ट्रेनिंग देने का एक प्रस्ताव रखा है। अगर इसे मंजूरी मिलती है, तो कंपनी का अपने 'रिमोट पायलट ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन' नेटवर्क के जरिए भारतीय सेना के साथ एक बड़ा जुड़ाव हो जाएगा।
IPO और फाइनेंशियल सेहत पर निवेशकों की नजर
निवेशकों के लिए यह डेवलपमेंट इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कंपनी आने वाले समय में अपना IPO लाने की तैयारी में है। हालांकि कंपनी ने प्रॉफिट दर्ज किया है, लेकिन इसके फाइनेंशियल हेल्थ को लेकर सतर्क रहना जरूरी है। हालिया डेटा के मुताबिक, कंपनी का ऑपरेटिंग कैश फ्लो नकारात्मक रहा है, जिसका मुख्य कारण 'ट्रेड रिसीवेबल्स' (बकाया भुगतान) का अधिक होना है।
सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स पर निर्भरता का रिस्क
Garuda Aerospace का बिजनेस मॉडल काफी हद तक B2G (Business-to-Government) कॉन्ट्रैक्ट्स पर टिका है। सरकारी इंडिजनाइजेशन (स्वदेशीकरण) की नीति से डिमांड तो बढ़ रही है, लेकिन इसका एक रिस्क यह है कि कंपनी की ग्रोथ पूरी तरह सरकारी नीतियों और टेंडर की समय-सीमा पर निर्भर है। यदि सरकारी बजट या नीति में कोई बदलाव आता है, तो सीधे तौर पर कंपनी के ऑपरेशंस प्रभावित हो सकते हैं।
निवेशकों को यह देखना होगा कि कंपनी कैसे अपने कैश कलेक्शन में सुधार करती है और सरकारी ऑर्डर्स पर अपनी निर्भरता कम करके मार्जिन को बनाए रखती है।
