डिफेंस सेक्टर की दिग्गज कंपनी GRSE ने Q1 FY27 में **43.8%** की जबरदस्त प्रॉफिट ग्रोथ दर्ज की है। कंपनी की मजबूत ऑर्डर बुक **₹13,596 करोड़** तक पहुंच गई है और अब प्रोडक्शन क्षमता को बढ़ाने के लिए कंपनी **₹2,670 करोड़** का निवेश कर रही है।
सरकारी शिपबिल्डर गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया है। कंपनी का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 43.82% बढ़कर ₹172.84 करोड़ हो गया है, जबकि रेवेन्यू में 38.53% की वृद्धि के साथ यह आंकड़ा ₹1,815 करोड़ तक पहुंच गया है।
इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार की तैयारी
कंपनी का पूरा फोकस अब अपने मैन्युफैक्चरिंग बेस को मजबूत करने पर है। बोर्ड ने ₹2,670 करोड़ के कैपिटल इन्वेस्टमेंट को मंजूरी दी है, जिसके तहत रायचक, शालीमार और किदरपुर की सुविधाओं को अपग्रेड किया जाएगा। इसका उद्देश्य मौजूदा 28 प्लेटफॉर्म की निर्माण क्षमता को इस साल के अंत तक 32 तक ले जाना है, जिसे भविष्य में 43 प्लेटफॉर्म तक पहुंचाने का रोडमैप तैयार किया गया है। यह विस्तार 'नेक्स्ट-जेनरेशन कार्वेट' जैसे जटिल प्रोजेक्ट्स के लिए बेहद जरूरी है, जिसमें GRSE फिलहाल L1 बिडर है।
नवरत्न स्टेटस और विविधीकरण
जून 2026 में 'नवरत्न' का दर्जा मिलने के बाद से कंपनी की निर्णय लेने की प्रक्रिया और तेज हुई है। डिफेंस के अलावा, कंपनी अपने पोर्टफोलियो में विविधता भी ला रही है। जुलाई 2026 में कंपनी ने ONGC के लिए चार प्लेटफॉर्म सप्लाई वेसल्स बनाने का ₹1,032 करोड़ का ठेका हासिल किया है।
निवेशकों के लिए जोखिम और जरूरी बातें
शिपबिल्डिंग सेक्टर में प्रोजेक्ट्स का समय काफी लंबा होता है। ऐसे में मटेरियल सप्लाई में देरी या डिजाइन में बदलाव का असर मार्जिन पर पड़ सकता है। कंपनी की निर्भरता सरकारी बजट और डिफेंस ऑर्डर पर ज्यादा है, इसलिए समय पर डिलीवरी और नए टेंडर्स जीतना कंपनी के लॉन्ग-टर्म वैल्युएशन के लिए सबसे महत्वपूर्ण पैरामीटर होगा। निवेशक अब इस बात पर नजर रखेंगे कि नई कैपेसिटी का कमीशनिंग कब तक होता है और मौजूदा बिड पाइपलाइन कितनी तेजी से पक्के ऑर्डर्स में बदलती है।
