भारत में रणनीतिक विस्तार
यह ₹100 करोड़ का नया निवेश पुणे फैसिलिटी में एडवांस्ड वेल्डिंग टेक्नोलॉजी (advanced welding technologies), नई इंस्पेक्शन इक्विपमेंट (inspection equipment) और प्रोडक्शन कैपेसिटी (production capacity) को बढ़ाने पर केंद्रित है। इस विस्तार से GE90, GEnx, GE9X जैसे महत्वपूर्ण इंजन कंपोनेंट्स और CFM इंटरनेशनल के LEAP इंजन (जो GE और Safran का ज्वाइंट वेंचर है) के उत्पादन में काफी वृद्धि होगी।
कंपनी भारत के कुशल कार्यबल (skilled workforce) और सरकारी समर्थन का लाभ उठाकर अपनी ग्लोबल सप्लाई चेन को मजबूत कर रही है। इसका मुख्य उद्देश्य सप्लाई चेन में आने वाली बाधाओं को कम करना और भविष्य के प्रोपल्शन सिस्टम्स (propulsion systems) के लिए नवाचार (innovation) को बढ़ावा देना है।
भारत का बढ़ता एयरोस्पेस हब
यह कदम भारत के तेजी से बढ़ते एयरोस्पेस सेक्टर में GE Aerospace की बढ़ती दिलचस्पी को दर्शाता है। 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' जैसी पहलों के चलते, भारत का एयरोस्पेस मार्केट 2033 तक $54.4 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, जिससे यह विदेशी निवेश के लिए एक प्रमुख आकर्षण बन गया है।
प्रतिस्पर्धी कंपनियां भी भारत में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही हैं। Safran 2030 तक भारत में अपना रेवेन्यू तीन गुना करके €3 बिलियन से अधिक करने की योजना बना रही है, जिसमें हैदराबाद में 2026 तक चालू होने वाले एक LEAP इंजन MRO सेंटर पर €200 मिलियन का निवेश शामिल है। Rolls-Royce भी भारत को एक तीसरे 'होम मार्केट' के रूप में देख रहा है।
मूल्यांकन और बाजार जोखिम
हालांकि, GE Aerospace को कुछ चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है। कंपनी का P/E रेश्यो 34.67-48.33 के बीच है, जो उसके 10 साल के औसत 20.19 से काफी ऊपर है। बढ़ते ऑपरेटिंग खर्चे, जैसे कि बेची गई वस्तुओं की लागत (cost of sales) और R&D, प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव डाल रहे हैं।
विश्लेषकों का नज़रिया
इसके बावजूद, विश्लेषकों (Analysts) का GE Aerospace के लिए नज़रिया आम तौर पर सकारात्मक बना हुआ है। कंसेंसस रेटिंग 'Buy' या 'Strong Buy' की ओर झुकी हुई है, और औसत टारगेट प्राइस $349-$353 के आसपास है। कंपनी 2026 में लो-डबल-डिजिट रेवेन्यू ग्रोथ की उम्मीद कर रही है, जिसमें भारत में किया गया निवेश एक अहम भूमिका निभाएगा।