फ्रांस और स्वीडन के बीच **€4.3 बिलियन** का एक बड़ा रक्षा समझौता हुआ है, जिसके तहत **2030** से स्वीडन को चार एडवांस फ्रिगेट (युद्धपोत) मिलेंगे। यह डील स्वीडन के नाटो (NATO) में शामिल होने के बाद यूरोप की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
बड़ी रक्षा साझेदारी की शुरुआत
यूरोप की रक्षा सुरक्षा को नया आयाम देते हुए फ्रांस और स्वीडन ने €4.3 बिलियन के एक मेगा डिफेंस कॉन्ट्रैक्ट पर मुहर लगा दी है। इस डील के तहत फ्रेंच शिपबिल्डर Naval Group चार हाई-टेक फ्रिगेट तैयार करेगा, जिनकी डिलीवरी 2030 से शुरू होगी। ये युद्धपोत फ्रांस की नेवी के 'अमिरल रोनार्क' (Amiral Ronarc'h) क्लास के जहाजों जैसे ही होंगे, जो बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस, टॉरपीडो और लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलों से लैस होंगे।
नाटो और सुरक्षा समीकरण
साल 2024 में नाटो में शामिल होने के बाद से ही स्वीडन अपनी नौसैनिक ताकत को तेजी से अपग्रेड कर रहा है। यह कॉन्ट्रैक्ट केवल हथियारों की खरीद नहीं है, बल्कि इसमें स्वीडिश नौसेना के जवानों के लिए फ्रांस द्वारा दी जाने वाली ट्रेनिंग भी शामिल है, ताकि वे इन जटिल प्लेटफॉर्म्स को कुशलता से चला सकें।
आपसी सहयोग और निवेश का गणित
निवेशकों और डिफेंस इंडस्ट्री के जानकारों के लिए यह एक संकेत है कि यूरोप अब अपनी सुरक्षा के लिए खुद पर निर्भर होना चाहता है। यह डील एकतरफा नहीं है; इसके बदले में फ्रांस ने स्वीडन की कंपनी Saab से €1.2 बिलियन (लगभग SEK 12.3 बिलियन) की लागत से दो 'GlobalEye' सर्विलांस एयरक्राफ्ट खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है।
चुनौतियां और भविष्य की राह
इतनी बड़ी डील में लंबे समय की रेवेन्यू विजिबिलिटी तो है, लेकिन 2030 तक का समय होने के कारण इसमें कुछ रिस्क भी हैं। इनमें प्रोजेक्ट की लागत बढ़ना, फ्रेंच और स्वीडिश सिस्टम का इंटीग्रेशन और भू-राजनीतिक बदलाव मुख्य हैं। निवेशकों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि कैसे Naval Group और Saab अपनी प्रोडक्शन टाइमलाइन को मैनेज करते हैं और आने वाले समय में यह सप्लाई चेन को कितना प्रभावित करता है।
