MTAR Tech में FIIs की हिस्सेदारी में बड़ी बढ़ोतरी, रक्षा क्षेत्र की ग्रोथ का मिला फायदा
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने MTAR Technologies में अपना निवेश काफी बढ़ाया है। वित्त वर्ष 2026 के अंत तक, कंपनी में उनकी हिस्सेदारी बढ़कर 17.3% हो गई है। यह बढ़ोतरी कंपनी के शानदार प्रदर्शन और भारतीय रक्षा क्षेत्र में हो रहे अभूतपूर्व विकास में उसके मजबूत योगदान को दर्शाती है।
भारत का रक्षा क्षेत्र बन रहा सुपरपावर
भारतीय रक्षा उद्योग इस समय अभूतपूर्व विकास के दौर से गुजर रहा है। FY26 में रक्षा निर्यात 60% से अधिक बढ़कर ₹38,424 करोड़ हो गया। वैश्विक रक्षा खर्च में वृद्धि, सप्लाई चेन में बदलाव और भारत के एक भरोसेमंद और किफायती सप्लायर के रूप में उभरने से यह संभव हुआ है। Nifty India Defence Index इस साल अब तक 16.09% चढ़ चुका है, जो Nifty 50 के प्रदर्शन से कहीं बेहतर है।
MTAR Technologies ने पेश किए रिकॉर्ड नतीजे
MTAR Technologies की बात करें तो, FY26 में FIIs की हिस्सेदारी 6.74% से बढ़कर 17.3% तक पहुंच गई। इसी दौरान, कंपनी ने ₹2,453.3 करोड़ के रिकॉर्ड ऑर्डर प्राप्त किए और 31 मार्च, 2026 तक उसके पास कुल ₹2,581.9 करोड़ का ऑर्डर बुक था। कंपनी का नेट प्रॉफिट साल-दर-साल 76% बढ़कर ₹94 करोड़ रहा, जबकि बिक्री 29.6% की बढ़ोतरी के साथ ₹876.2 करोड़ दर्ज की गई।
वैल्यूएशन और एनालिस्ट्स की राय
अपने शानदार प्रदर्शन के बावजूद, MTAR Technologies का P/E रेश्यो लगभग 233x है, जो इंडस्ट्री के औसत से काफी ज्यादा है। हालांकि, एनालिस्ट्स का इस स्टॉक पर 'स्ट्रॉन्ग बाय' का भरोसा कायम है, और उनका औसत 12 महीने का टारगेट प्राइस ₹7,358.25 है। मैनेजमेंट ने FY27 के लिए रेवेन्यू ग्रोथ गाइडेंस को 80% तक बढ़ाया है, और क्लीन एनर्जी सेगमेंट से बड़े ऑर्डर्स की उम्मीद के साथ-साथ सितंबर 2026 तक ऑयल एंड गैस सेक्टर में भी विस्तार की योजना है।
मुख्य जोखिम: वैल्यूएशन और एग्जीक्यूशन
MTAR Technologies का मौजूदा वैल्यूएशन एक महत्वपूर्ण जोखिम पेश करता है, क्योंकि बाज़ार पहले से ही भविष्य की जबरदस्त ग्रोथ को इसमें शामिल कर चुका है। कंपनी का रिटर्न ऑन कैपिटल एम्प्लॉयड (ROCE) 15.2% है, जो इंडस्ट्री के औसत से थोड़ा कम है। वहीं, Bharat Dynamics Ltd. और Mazagon Dock Shipbuilders Ltd. जैसी प्रतिस्पर्धी कंपनियां वैल्यूएशन के लिहाज से अधिक आकर्षक हो सकती हैं। इसके अलावा, पिछले 140 दिनों में बढ़े हुए रिसीवेबल डेज़ पर भी नज़र रखना होगा ताकि वर्किंग कैपिटल मैनेजमेंट की कुशलता बनी रहे।
