लागत में कटौती और विकल्पों का विस्तार
Eutelsat, जो हाल ही में OneWeb के साथ मर्ज हुई है, को सैटेलाइट लॉन्च के लिए नए और सस्ते विकल्प तलाशने की जरूरत है। पिछले कुछ समय में भू-राजनीतिक कारणों से रूसी Soyuz लॉन्च पर असर पड़ा है, जिससे Eutelsat काफी हद तक SpaceX के Falcon 9 और यूरोपीय Ariane रॉकेट पर निर्भर हो गई थी। ऐसे में, ISRO का LVM3 रॉकेट एक आकर्षक विकल्प बनकर उभरा है। अनुमान है कि LVM3 का एक लॉन्च लगभग 5.5 करोड़ से 6 करोड़ डॉलर तक सस्ता पड़ सकता है, जो इसे ग्लोबल मार्केट में बेहद प्रतिस्पर्धी बनाता है। यह बातचीत फ्रांस और भारत के बीच बढ़ते अंतरिक्ष सहयोग को भी दर्शाती है।
बढ़ती ग्लोबल प्रतियोगिता
Eutelsat की OneWeb के पास लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में लगभग 648 सैटेलाइट हैं, जो इसे SpaceX के Starlink (जिसके पास करीब 7,000 सैटेलाइट हैं) के बाद दूसरा सबसे बड़ा ऑपरेटर बनाता है। Amazon का Project Kuiper भी अपनी 3,200 सैटेलाइट की योजना पर काम कर रहा है और उसने पहले ही 80 से अधिक लॉन्च बुक कर लिए हैं। Starlink मुख्य रूप से कंज्यूमर मार्केट को टारगेट करता है, जबकि Eutelsat OneWeb एंटरप्राइज और सरकारी ग्राहकों पर ध्यान केंद्रित करता है। ग्लोबल लॉन्च मार्केट का अनुमान 2025 तक 27 अरब डॉलर तक पहुंचने का है, जिसमें SpaceX का दबदबा है (ग्लोबल लॉन्च का 60% से अधिक)। ISRO का Eutelsat के लिए एक लॉन्च ऑप्शन बनना, अमेरिका और यूरोप के बाहर एक अहम विकल्प पेश करेगा।
वित्तीय चुनौतियां बरकरार
इन रणनीतिक कदमों के बावजूद, Eutelsat को वित्तीय चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। मार्च 2026 तक इसका निगेटिव प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेशियो -2.72 है, जो जारी नुकसान की ओर इशारा करता है। कंपनी का मार्केट कैप 2.5 अरब यूरो है और शेयर पिछले 52 हफ्तों में 1.59 यूरो से 3.69 यूरो के बीच रहा है। पिछले एक साल में Eutelsat के शेयर में 51% से अधिक की गिरावट आई है। कंपनी ने अपनी वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के लिए 1.5 अरब यूरो की पूंजी जुटाई है। विश्लेषकों की राय मिली-जुली है, कुछ 'Sell' की सलाह दे रहे हैं। Starlink और Amazon के Kuiper से कड़ी प्रतिस्पर्धा भी एक बड़ा फैक्टर है। Eutelsat को अपने संयुक्त सैटेलाइट ऑपरेशंस से लाभप्रद वृद्धि साबित करने की आवश्यकता है।
फंडिग और ग्रोथ की उम्मीदें
Eutelsat का कहना है कि 2031 तक के लिए जरूरी फंडिंग सुरक्षित कर ली गई है और प्रमुख रीफाइनेंसिंग डील पूरी हो चुकी हैं। यह 2026 से 2029 के बीच लगभग 4 अरब यूरो के निवेश की योजना सहित अपनी रणनीति के प्रति प्रतिबद्धता दिखाता है। कंपनी को उम्मीद है कि जल्द ही उसके ऑर्बिट में 1,000 से अधिक सैटेलाइट होंगे। दूरस्थ क्षेत्रों में कनेक्टिविटी की बढ़ती मांग LEO सैटेलाइट सेवाओं का समर्थन करती है। 2025-26 की पहली छमाही में Eutelsat के LEO बिज़नेस का रेवेन्यू लगभग 60% बढ़ा है। भारत का 2033 तक अपनी स्पेस इकोनॉमी को 44 अरब डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य भी ISRO की कमर्शियल लॉन्च योजनाओं का समर्थन करता है।