200 विमानों का ऑर्डर ही चाबी
Embraer ने भारत में फाइनल असेंबली लाइन (FAL) स्थापित करने के लिए 200 से ज़्यादा विमानों के पक्के ऑर्डर की शर्त रखी है। कंपनी के प्रेसिडेंट और सीईओ Francisco Gomes Neto ने साफ किया है कि इस बड़े निवेश के लिए यह ऑर्डर वॉल्यूम 'वायबल और फीज़िबल' (viable and feasible) यानी व्यावहारिक और संभव होना ज़रूरी है। अगर इस साल ऑर्डर मिल जाते हैं, तो असेंबली लाइन 2028 तक चालू हो सकती है, जिसमें निर्माण में करीब 24 महीने लगेंगे।
बड़े ऑर्डर मिलने में लगने वाले समय को देखते हुए, Embraer एक 'कंप्लीशन सेंटर' (completion centre) को शुरुआती कदम के तौर पर भी देख रही है। इस सेंटर में विमानों की पेंटिंग, इंटीरियर फिटिंग और आखिरी कस्टमाइज़ेशन जैसे काम होंगे, जबकि प्लेन सीधे ब्राज़ील से आएंगे। यह स्ट्रैटेजी बड़े निवेश में जोखिम कम करने के लिए अपनाई जा रही है।
भारत का रीजनल जेट बाज़ार
Embraer का अनुमान है कि अगले 20 साल में भारत में कम से कम 500 रीजनल जेट (80-146 सीटों वाले) की ज़रूरत होगी। इसकी वजह भारत का दुनिया में सबसे तेज़ी से बढ़ता एविएशन मार्केट, नए एयरपोर्ट्स का खुलना और 'UDAN' जैसी सरकारी स्कीमें हैं, जो रीजनल कनेक्टिविटी बढ़ा रही हैं।
Embraer खासकर अपने E175 रीजनल जेट पर फोकस कर रही है, जो 76-88 सीटों वाला है और छोटी से मध्यम दूरी की उड़ानों के लिए उपयुक्त है। भारतीय एयरलाइन Star Air पहले से ही इस मॉडल का इस्तेमाल कर रही है।
हालांकि, इस सेगमेंट में ATR जैसी कंपनियां भी हैं, जो 2044 तक 210 टर्बोप्रॉप विमानों की मांग देख रही हैं। वहीं, Boeing का अनुमान है कि 2044 तक भारत को 10 से भी कम रीजनल जेट चाहिए होंगे, और वह सिंगल-आइसल एयरक्राफ्ट की ज़्यादा मांग देखता है।
Adani Group के साथ साझेदारी और सप्लाई चेन
Embraer इस प्लान के तहत भारत में सिर्फ़ असेंबली लाइन ही नहीं, बल्कि मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) फैसिलिटीज़, पायलट ट्रेनिंग सेंटर और फुल फ्लाइट सिमुलेटर भी स्थापित करना चाहती है। इसके लिए Adani Group के साथ एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) साइन किया गया है। गुजरात के Dholera शहर को इस प्लांट के लिए एक प्रमुख साइट के तौर पर देखा जा रहा है।
कंपनी स्थानीय सप्लायर बेस बनाने पर भी ज़ोर दे रही है। हाल ही में, उसने एरोस्पेस-ग्रेड एल्यूमीनियम बनाने के लिए Hindalco के साथ पार्टनरशिप की है और 15 से ज़्यादा भारतीय सप्लायर्स के साथ काम कर रही है। Embraer भारतीय वायु सेना के लिए अपने C-390 Millennium ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट को भी पिच कर रही है।
चुनौतियाँ और प्रतिस्पर्धा
Embraer के भारत में FAL खोलने की राह में सबसे बड़ी चुनौती 200 विमानों के ऑर्डर की शर्त को पूरा करना है। भारतीय एयरलाइंस Boeing और Airbus के बड़े विमानों के लिए भी ऑर्डर देती हैं, इसलिए Embraer के लिए यह एक बड़ा कॉम्पिटिटिव माहौल है।
खास बात यह है कि Boeing और Airbus जैसी बड़ी कंपनियां भारत में अपनी FAL खोलने से हिचकिचा रही हैं। वे भारत से कंपोनेंट्स की सोर्सिंग बढ़ाना पसंद कर रही हैं, ताकि भविष्य में कोई भारतीय खिलाड़ी उनके लिए कॉम्पिटिटर न बन जाए।
आगे की राह
बावजूद इसके, Wall Street के एनालिस्ट Embraer पर बुलिश (bullish) बने हुए हैं। कंपनी का $31.6 बिलियन का रिकॉर्ड बैकलॉग और मज़बूत पार्टनरशिप इसके लिए पॉजिटिव हैं। एनालिस्ट्स का एवरेज प्राइस टारगेट करीब $71.67 है।
Dholera जैसे संभावित एविएशन हब का विकास और सरकारी सपोर्ट Embraer की ग्लोबल स्ट्रैटेजी का अहम हिस्सा है, लेकिन भारत में फुल-स्केल मैन्युफैक्चरिंग की टाइमलाइन अभी भी ऑर्डर्स पर टिकी हुई है।