Digilogic Systems का शेयर 3 दिन में 56% चढ़ा, डिफेंस ऑर्डर मिलने से आई बहार!

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AuthorNeha Patil|Published at:
Digilogic Systems का शेयर 3 दिन में 56% चढ़ा, डिफेंस ऑर्डर मिलने से आई बहार!

Digilogic Systems के शेयरों में पिछले 3 दिनों में **56%** की ताबड़तोड़ तेजी आई है, जो बुधवार को **₹183** के इंट्राडे हाई पर पहुंच गए। डिफेंस सेक्टर में मिले नए ऑर्डर इस तेजी का मुख्य कारण हैं।

डिफेंस ऑर्डर से चमकी Digilogic Systems

एयरोस्पेस और डिफेंस सेक्टर की SME कंपनी Digilogic Systems के शेयरों ने बुधवार को ₹183 का इंट्राडे हाई बनाया। पिछले तीन ट्रेडिंग सेशन में यह 56% की जबरदस्त उछाल है। यह तेजी सरकारी और डिफेंस कंपनियों से मिले कई ऑर्डर के ऐलान के बाद आई है, जिसने कंपनी के प्रति बाजार के सेंटिमेंट को काफी मजबूत किया है।

ऑर्डर बुक हुई मजबूत

14 जुलाई 2026 को कंपनी ने डिफेंस मिनिस्ट्री से ₹4.08 करोड़ का एक परचेज ऑर्डर हासिल किया। इसके तहत मार्च 2027 तक स्पेस-बॉर्न सिस्टम की टेस्टिंग में इस्तेमाल होने वाले सैटेलाइट फ्रंट एंड चेकआउट और मॉनिटरिंग असेंबली की सप्लाई और इंस्टॉलेशन की जानी है। इससे पहले, जून 2026 के अंत में, कंपनी को एक डिफेंस PSU से ₹1.60 करोड़ का स्टैटिक टेस्ट जिग सप्लाई करने का ऑर्डर मिला था।

प्रॉफिट और फ्यूचर ग्रोथ

कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2026 में ₹10.43 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो पिछले साल के मुकाबले 34% ज्यादा है। मैनेजमेंट का अनुमान है कि FY27 में रेवेन्यू 25% से 30% और EBITDA व PAT 45% से 50% बढ़ सकते हैं। यह अनुमान कंपनी के मौजूदा ऑर्डर बुक और 'मेक इन इंडिया' व 'आत्मनिर्भर भारत' पहल के तहत घरेलू डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने वाली सरकारी योजनाओं पर आधारित है।

निवेशकों के लिए रिस्क फैक्टर

जहां ग्रोथ की उम्मीदें काफी अच्छी हैं, वहीं निवेशकों को कुछ ऑपरेशनल रिस्क पर भी नजर रखनी चाहिए। कंपनी के फाइनेंशियल डेटा के अनुसार, ग्राहकों से पेमेंट वसूलने में लगने वाला समय (Debtor Days) लगभग 203 दिन है। इसके साथ ही, लगभग 140 दिनों की वर्किंग कैपिटल की जरूरत कंपनी के कैश फ्लो और लिक्विडिटी पर दबाव डाल सकती है। बता दें कि लगातार प्रॉफिट कमाने के बावजूद, Digilogic Systems ने अभी तक शेयरधारकों को कोई डिविडेंड नहीं दिया है, क्योंकि कंपनी ऑपरेशंस में कैश को री-इन्वेस्ट करने को प्राथमिकता दे रही है। एक SME-लिस्टेड कंपनी होने के नाते, इसमें बड़े डिफेंस फर्मों की तुलना में ज्यादा प्राइस वोलेटिलिटी और कम स्टॉक लिक्विडिटी का जोखिम भी है।

आगे क्या देखें?

निवेशकों को अब मार्च 2027 की डेडलाइन तक डिफेंस मिनिस्ट्री के ऑर्डर का समय पर एग्जीक्यूशन देखना होगा। साथ ही, कंपनी अपने प्रोजेक्टेड ग्रोथ टारगेट को सपोर्ट करने और बढ़ती वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने के लिए अपने कैश कनवर्जन साइकिल में कितना सुधार कर पाती है, इस पर भी बाजार की नजर रहेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.