डिफेंस सेक्टर में दिखा दो-रंग
भारत के डिफेंस सेक्टर में चुनिंदा शेयरों में उछाल देखने को मिल रहा है. एयरोस्पेस और एवियोनिक्स के बड़े खिलाड़ी, Hindustan Aeronautics Ltd (HAL) और Bharat Electronics Ltd (BEL), लगातार निवेशकों को आकर्षित कर रहे हैं. इन कंपनियों की मजबूत बाजार स्थिति और भारी भरकम ऑर्डर बुक इसकी मुख्य वजहें हैं.
HAL के शेयर ₹4,226.10 के आसपास कारोबार कर रहे हैं, जिसका मार्केट कैप करीब ₹2.82 ट्रिलियन है. वहीं, BEL भी डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में अपनी अहम भूमिका के चलते शेयर की कीमतों में बढ़त दिखा रहा है. इन दोनों कंपनियों के रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 60 के आसपास हैं, जो कि निफ्टी डिफेंस इंडेक्स के दूसरे शेयरों के औसत RSI (जो 50 से नीचे है) के मुकाबले काफी मजबूत स्थिति दिखाता है. इससे साफ है कि निवेशकों का भरोसा इन स्थापित कंपनियों पर ज्यादा है.
इन कंपनियों की शानदार परफॉरमेंस का एक बड़ा कारण सरकार का लगातार सपोर्ट और 'आत्मनिर्भर भारत' पहल है. यूनियन बजट 2026 में डिफेंस सेक्टर के लिए रिकॉर्ड ₹7.85 लाख करोड़ का आवंटन किया गया है, जिसमें कैपिटल एक्सपेंडिचर के लिए ₹2.19 लाख करोड़ रखे गए हैं. इससे सेना के आधुनिकीकरण और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. HAL का FY 2024-25 के लिए सालाना डिफेंस प्रोडक्शन ₹1.51 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है.
शिपबिल्डिंग: सरकारी सब्सिडी पर टिकी रिकवरी
वहीं, शिपबिल्डिंग सेगमेंट की तस्वीर थोड़ी अलग है. Cochin Shipyard Ltd (CSL), Mazagon Dock Shipbuilders Ltd (MDL) और Garden Reach Shipbuilders & Engineers Ltd (GRSE) जैसी कंपनियां थोड़ी बहुत रिकवरी दिखा रही हैं, लेकिन उनकी ग्रोथ काफी हद तक सरकारी मदद पर निर्भर है.
सरकार के समुद्री विकास पैकेज, जिसमें ₹70,000 करोड़ की योजनाएं शामिल हैं, इन कंपनियों के लिए संजीवनी का काम कर रही हैं. इन पहलों के तहत निर्माण लागत का 15-25% तक सब्सिडी के रूप में मिल रहा है. इसी का नतीजा है कि CSL को CMA CGM से 300 मिलियन डॉलर के छह कंटेनर शिप बनाने का बड़ा ऑर्डर मिला है, जो भारत को ग्लोबल शिपबिल्डिंग में आगे ले जाने का लक्ष्य रखता है. सरकार का लक्ष्य 2030 तक भारत को टॉप 10 और 2047 तक टॉप 5 शिपबिल्डिंग देशों में शामिल करना है.
हालांकि, इन कंपनियों का ग्रोथ सरकार की नीतियों और विदेशी ऑर्डरों पर बहुत ज्यादा निर्भर है. MDL ने पिछले एक साल में सिर्फ 8.20% का रिटर्न दिया है, जबकि GRSE का प्रदर्शन 100% से भी ज्यादा रहा है.
वैल्यूएशन और निर्भरता का जोखिम
सरकारी पहलों के बावजूद, कुछ डिफेंस और शिपबिल्डिंग शेयरों को लेकर सावधानी बरतना जरूरी है. Bharat Forge जैसी कंपनियों का वैल्यूएशन (P/E रेशियो 60-70 के बीच) मौजूदा परफॉरमेंस के मुकाबले महंगा लग रहा है. पिछले तीन सालों में कंपनी की प्रॉफिट ग्रोथ सिर्फ 7.05% और रेवेन्यू ग्रोथ 12.24% रही है.
शिपबिल्डिंग में GRSE का P/E रेशियो 40.6 और Mazagon Dock का 39.52 है. Cochin Shipyard का रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) 12.8% रहा है, जो काफी कम है. इन कंपनियों की ग्रोथ काफी हद तक सरकारी सब्सिडी और विदेशी ऑर्डरों पर टिकी है, जो एक तरह की निर्भरता पैदा करती है. अगर सरकारी खर्च कम होता है या अंतरराष्ट्रीय मांग में बदलाव आता है, तो ऑर्डरों पर असर पड़ सकता है.
आगे क्या?
डिफेंस सेक्टर का भविष्य अभी भी सकारात्मक दिख रहा है, क्योंकि सरकार का आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भरता पर जोर बना हुआ है. HAL और BEL जैसी कंपनियों के पास मजबूत ऑर्डर बुक हैं, जिससे उनकी कमाई का अनुमान लगाना आसान है. शिपबिल्डिंग सेक्टर के लिए सरकार की वित्तीय मदद और लगातार नए ऑर्डर मिलना बहुत जरूरी होगा. यह सेक्टर दो हिस्सों में बंटा रहेगा, जहां कुछ कंपनियां अपनी मजबूती के दम पर आगे बढ़ेंगी, तो वहीं बाकी कंपनियां सरकारी नीतिगत समर्थन और बदलती वैश्विक मांग पर निर्भर रहेंगी.