डिफेंस सेक्टर में क्यों आई इतनी बड़ी उछाल?
जनवरी में डिफेंस सेक्टर में ₹3,294 करोड़ से अधिक के ऑर्डर मिलने का सिलसिला सीधे तौर पर सरकार के बड़े बूस्ट का नतीजा है। हाल ही में आए यूनियन बजट में रक्षा मंत्रालय के लिए ₹7.85 लाख करोड़ का भारी-भरकम आवंटन किया गया है, जो भारत के अनुमानित GDP का लगभग 2% है। यह बड़ा आर्थिक सहारा और 'मेक इन इंडिया' की मुहिम मिलकर घरेलू डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स के लिए बड़े मौकों के दरवाजे खोल रही है।
जनवरी के ऑर्डर्स और मार्केट का रिएक्शन
जनवरी का महीना डिफेंस स्टॉक्स के लिए काफी एक्टिव रहा, जहाँ ऑर्डर्स मिलने के साथ ही स्टॉक की कीमतों में भी हलचल देखी गई। Bharat Electronics (BEL) ने अपने डिफेंस और नॉन-डिफेंस सेगमेंट में कुल ₹1,775 करोड़ के बड़े कांट्रैक्ट्स हासिल किए। इन ऑर्डर्स में कम्युनिकेशन इक्विपमेंट, मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स और ड्रोन डिटेक्शन सिस्टम शामिल हैं। इससे BEL का ऑर्डर बुक ₹73,015 करोड़ (1 जनवरी 2026 तक) और मज़बूत हो गया। कंपनी के शेयर में पिछले महीने करीब 8.93% की अच्छी बढ़त दर्ज की गई।
वहीं, AXISCADES Technologies ने अपनी सब्सिडियरी Mistral Solutions के ज़रिए ₹100 करोड़ का एक डिफेंस ऑर्डर जीता है, जो एडवांस्ड सिग्नल और डेटा प्रोसेसिंग यूनिट्स के लिए है। हालाँकि, इस पॉजिटिव खबर के बावजूद, कंपनी के शेयर में पिछले महीने लगभग 18.5% की गिरावट देखी गई। यह दिखाता है कि बाज़ार का रिएक्शन सिर्फ सीधे ऑर्डर मिलने से तय नहीं होता, बल्कि दूसरी फैक्टर भी असर डालते हैं।
Solar Industries India Ltd. ने एक्सपोर्ट मार्केट में अपनी धाक जमाते हुए अकेले 30 जनवरी को ₹1,419 करोड़ के अंतर्राष्ट्रीय डिफेंस ऑर्डर्स हासिल किए। ये ऑर्डर डिफेंस प्रोडक्ट्स के लिए थे, जो भारतीय हथियारों की बढ़ती ग्लोबल डिमांड को दर्शाते हैं। इस डील के दम पर कंपनी के शेयर में पिछले महीने 7% का उछाल आया।
सेक्टर का अंदरूनी विश्लेषण
भारत का डिफेंस सेक्टर 'आत्मनिर्भरता' और 'स्वदेशीकरण' की मुहिम के चलते एक बड़े बदलाव के दौर से गुज़र रहा है। बजट 2026-27 में रक्षा मंत्रालय के लिए ₹7.85 लाख करोड़ का आवंटन, जिसमें कैपिटल एक्सपेंडिचर और डोमेस्टिक प्रोक्योरमेंट पर ज़ोर है, इस दिशा को और मज़बूत करता है। कैपिटल एक्विजिशन बजट का लगभग 75% हिस्सा अब भारतीय इंडस्ट्रीज़ के लिए आरक्षित है, जो साफ दिखाता है कि सरकार लोकल मैन्युफैक्चरिंग को प्राथमिकता दे रही है।
BEL जैसी कंपनियाँ सिर्फ डिफेंस पर ही नहीं, बल्कि डेटा सेंटर और साइबर सिक्योरिटी जैसे नए क्षेत्रों में भी विस्तार करके इस पॉलिसी का फायदा उठा रही हैं। AXISCADES Technologies भी इंटरनेशनल पार्टनरशिप्स के ज़रिए अपनी क्षमता बढ़ा रही है, खासकर एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग और MRO सर्विसेज में। Solar Industries की एक्सपोर्ट सफलता बताती है कि भारतीय डिफेंस प्रोडक्ट्स, खासकर एम्युनिशन और स्पेशलाइज्ड सिस्टम्स, ग्लोबल लेवल पर कितने कॉम्पिटिटिव हो रहे हैं।
वैल्यूएशन की बात करें तो, फरवरी 2026 की शुरुआत तक BEL का P/E रेश्यो लगभग 53.8x था, जबकि Solar Industries का P/E 91.2x के आसपास था। AXISCADES Technologies का P/E भी करीब 55.54x के आसपास था, जो दिखाता है कि बाज़ार इन स्टॉक्स से काफी उम्मीदें लगा रहा है। बजट के बाद डिफेंस सेक्टर में कुछ विश्लेषकों ने हाई P/E को लेकर चिंता जताई है, लेकिन लंबी अवधि के आउटलुक को लेकर वे अभी भी बुलिश हैं।
Hindustan Aeronautics Ltd (HAL) और Bharat Dynamics Ltd (BDL) जैसी कंपनियाँ भी डिफेंस बजट में हुई बढ़ोतरी और 'मेक इन इंडिया' पुश का फायदा उठाने की उम्मीद कर रही हैं। अगले 2 से 4 सालों में इन सरकारी कंपनियों के लिए लगातार ऑर्डर्स आने की संभावना है।
भविष्य की राह: लगातार ग्रोथ और स्ट्रेटेजिक डेवलपमेंट
विश्लेषकों का डिफेंस सेक्टर के लिए आउटलुक काफी पॉजिटिव बना हुआ है। उनका मानना है कि सरकार के मॉडर्नाइजेशन और स्वदेशी प्रोडक्शन पर फोकस के कारण ऑर्डर्स का यह सिलसिला जारी रहेगा। Motilal Oswal का मानना है कि BEL, HAL, और BDL जैसी कंपनियाँ इन नीतियों से सबसे ज़्यादा फायदा उठाने की स्थिति में हैं। इस सेक्टर में डबल-डिजिट ग्रोथ की उम्मीद है, जिसे स्ट्रैटेजिक पॉलिसी और कैपिटल एक्सपेंडिचर में हुई भारी वृद्धि का सपोर्ट मिलेगा। Morgan Stanley ने BEL पर अपना बुलिश नज़रिया बरक़रार रखा है और मजबूत रेवेन्यू विजिबिलिटी और बड़े ऑर्डर बुक के आधार पर इसका टारगेट प्राइस बढ़ाया है। बजट के बाद बाज़ार में थोड़ी बहुत उठापटक के बावजूद, बढ़ते डिफेंस एलोकेशन और डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग पर ज़ोर, भारतीय डिफेंस इंडस्ट्री के लिए एक मजबूत लॉन्ग-टर्म आउटलुक का संकेत दे रहा है।