फ्रांसीसी कंपनी Dassault Aviation ने अपने Rafale फाइटर जेट्स में भारत में बने Astra और Rudram मिसाइलों को लगाने पर अपनी सहमति दे दी है। यह फैसला ₹2 लाख करोड़ की MRFA टेंडर प्रक्रिया के लिए एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।
भारत के रक्षा क्षेत्र में एक बड़ी हलचल देखी जा रही है। Dassault Aviation ने आधिकारिक तौर पर भारतीय हथियारों को अपने Rafale विमानों के साथ जोड़ने पर मुहर लगा दी है। यह कदम ₹2 लाख करोड़ से अधिक के Medium Role Fighter Aircraft (MRFA) प्रोग्राम के लिए एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। अब इन विमानों में DRDO द्वारा विकसित Astra Mk1, Mk2 और Rudram एंटी-रेडिएशन मिसाइलें तैनात की जा सकेंगी, जिससे तकनीकी बाधाएं दूर हो गई हैं।
MRFA टेंडर का रणनीतिक असर
भारतीय वायु सेना की स्क्वाड्रन ताकत को बढ़ाने के उद्देश्य से यह डील 'Buy-and-Make' मॉडल के तहत की जा रही है, जिसमें 50-60% प्रोडक्शन भारत में होना अनिवार्य है। यह भारतीय डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स के लिए लंबी अवधि के बड़े मौके पैदा करेगा, क्योंकि Dassault को स्थानीय भागीदारों के साथ मिलकर पूरी उत्पादन और मेंटेनेंस फैसिलिटी तैयार करनी होगी।
वित्तीय मोर्चे पर, Dassault Aviation ने H1 2026 में लगभग €4.4 बिलियन का रेवेन्यू दर्ज किया है और कंपनी को पूरे 2026 के लिए €8.5 बिलियन के रेवेन्यू की उम्मीद है।
निवेश से जुड़े रिस्क और चुनौतियां
डिफेंस सेक्टर पर नजर रखने वाले निवेशकों को यह याद रखना चाहिए कि इतने बड़े प्रोजेक्ट्स में कुछ जोखिम भी शामिल हैं:
- सप्लाई चेन: ग्लोबल सप्लाई चेन की दिक्कतों के कारण प्रोडक्शन टाइमलाइन पर असर पड़ सकता है।
- जियोपॉलिटिकल रिस्क: यह पूरा प्रोजेक्ट कूटनीतिक संबंधों और सरकार के बजट पर निर्भर है, इसलिए किसी भी नीतिगत बदलाव से अनिश्चितता बढ़ सकती है।
- वर्किंग कैपिटल: 'Buy-and-Make' मॉडल में भारी वर्किंग कैपिटल की जरूरत होती है, जो अगर पेमेंट में देरी हुई तो कैश फ्लो पर दबाव डाल सकती है।
मार्च 2027 तक इस प्रक्रिया को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके बाद टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और जॉइंट वेंचर स्ट्रक्चर्स पर निवेशकों की निगाहें टिकी रहेंगी।
