DRDO और University of Hyderabad ने मिलकर हाई-एनर्जी रॉकेट फ्यूल 'BAM-H24' के लिए पेटेंट हासिल कर लिया है। यह स्वदेशी तकनीक भारत के डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भरता की ओर एक बड़ा कदम है, जो विदेशी ईंधन पर निर्भरता को कम करेगी।
स्वदेशी तकनीक की नई उपलब्धि
रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और हैदराबाद विश्वविद्यालय को Patent No. 599900 मिला है। इसे 'एडवांस्ड सेंटर ऑफ रिसर्च इन हाई एनर्जी मैटेरियल्स' (ACRHEM) द्वारा तैयार किया गया है। यह नया ईंधन बोरोन, हाइड्रोजन और नाइट्रोजन का एक विशेष मिश्रण है, जिसे मिसाइल सिस्टम और लॉन्च वाहनों की क्षमता बढ़ाने के लिए बनाया गया है।
BAM-H24 की खासियत
इस फ्यूल की सबसे बड़ी खूबी इसका 'नॉन-हाइग्रोस्कोपिक' होना है, यानी यह नमी को नहीं सोखता। रक्षा उपकरणों के लिए यह बेहद अहम है, क्योंकि यह इसे नमी वाले इलाकों में भी लंबे समय तक सुरक्षित और स्थिर रखता है।
डिफेंस सेक्टर और 'आत्मनिर्भर भारत' पर असर
फिलहाल भारत हाई-एनर्जी मैटेरियल्स के लिए बड़े पैमाने पर इंपोर्ट पर निर्भर है। इस पेटेंट के साथ सरकार अब प्रोडक्शन कॉस्ट घटाने और सप्लाई चेन की बाधाओं को दूर करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। हालांकि, ये दोनों संस्थान लिस्टेड नहीं हैं, लेकिन डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के लिए यह तकनीक आने वाले समय में गेम-चेंजर साबित हो सकती है। अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि लैब से निकलकर यह टेक्नोलॉजी कब तक इंडस्ट्रियल-स्केल पर प्रोडक्शन के लिए कंपनियों को ट्रांसफर की जाती है।
