DRDO ने VIMARSH इवेंट के दौरान 13 घरेलू कंपनियों को 9 महत्वपूर्ण डिफेंस टेक्नोलॉजी के लाइसेंस ट्रांसफर किए हैं। इस कदम का मकसद मिसाइल, अंडरवाटर माइन्स और गाइडेंस सिस्टम का उत्पादन भारत में तेजी से बढ़ाना है।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने 15 सितंबर, 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 'VIMARSH' कार्यक्रम में देश की रक्षा क्षमताओं को मजबूती देने वाला एक बड़ा ऐलान किया। DRDO ने 9 लाइसेंसिंग एग्रीमेंट फॉर ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी (LAToT) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसका लक्ष्य डिफेंस हार्डवेयर के उत्पादन को प्रयोगशालाओं से बाहर निकाल कर सीधे फैक्ट्रियों तक ले जाना है।
स्वदेशी उत्पादन का विस्तार
इन टेक्नोलॉजीज के जरिए अब मिसाइल प्रोपल्शन कंपोनेंट्स, मल्टी-इंफ्लुएंस ग्राउंड माइन्स, वायरलेस डेटोनेशन सिस्टम और सबमरीन हाइड्रो सूट जैसे अत्याधुनिक हथियारों का निर्माण भारत में होगा। इस प्रोजेक्ट में Bharat Dynamics Ltd (BDL) के साथ-साथ Apollo Micro Systems, Solar Defence & Aerospace, Premier Explosives और Ananth Technologies जैसी निजी कंपनियां शामिल हैं। अब ये कंपनियां केवल असेंबली तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि क्रिटिकल सब-सिस्टम के निर्माण में मुख्य भूमिका निभाएंगी।
इंडस्ट्री के लिए नए मानक और नियम
DRDO ने अब निजी कंपनियों और MSMEs के लिए एंट्री बैरियर्स को कम कर दिया है। सबसे बड़ा बदलाव DRDO द्वारा सॉफ्टवेयर सोर्स कोड साझा करने की नई नीति है, जिससे कंपनियां डिफेंस सिस्टम को बेहतर तरीके से मेंटेन कर सकेंगी। इसके अलावा, Quality Council of India के साथ मिलकर SAMAR 2.0 (System for Advance Manufacturing Assessment and Rating) लॉन्च किया गया है, जो इन कंपनियों की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और क्वालिटी बेंचमार्क को जांचेगा।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
भले ही यह टेक्नोलॉजी ट्रांसफर एक पॉजिटिव संकेत है, लेकिन असल परीक्षा लैब के प्रोटोटाइप को मास प्रोडक्शन में बदलने की होगी। निवेशकों को अब इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि ये कंपनियां क्वालिटी बनाए रखते हुए अपने ऑपरेशंस को कितनी तेजी से स्केल (Scale) करती हैं। साथ ही, कंपनियों द्वारा सरकारी सर्टिफिकेशन को पूरा करना और सेटअप के दौरान आने वाले खर्चों को मैनेज करना उनके मुनाफे (Profitability) के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी।
