DRDO Surveillance System: डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़े कदम, खास तकनीक का सफल परीक्षण

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AuthorNeha Patil|Published at:
DRDO Surveillance System: डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़े कदम, खास तकनीक का सफल परीक्षण

DRDO ने स्ट्रैटोस्फेरिक सर्विलांस प्लेटफॉर्म का सफल परीक्षण किया है, जो 'स्यूडो-सैटेलाइट' की तरह काम करेगा। इसके अलावा, लद्दाख में हाई-एल्टीट्यूड पैराशूट का सफल ट्रायल भी पूरा किया गया, जो भारत की डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को और मजबूत करेगा।

स्वदेशी तकनीक की बड़ी उड़ान

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने एयरोस्पेस तकनीक में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। हालिया ट्रायल के दौरान, इस प्लेटफॉर्म ने 21 किलोमीटर की ऊंचाई हासिल की और 20 किलोमीटर की ऊंचाई पर 30 मिनट से अधिक समय तक स्थिर रहकर अपनी नेविगेशन क्षमता का प्रदर्शन किया। यह सिस्टम सैटेलाइट के मुकाबले काफी सस्ता है और लगातार सर्विलांस में सक्षम है।

लद्दाख में पैराशूट का सफल परीक्षण

DRDO ने न्योमा, लद्दाख में एडवांस्ड हाई-एल्टीट्यूड पैराशूट (AHAP) का भी सफल परीक्षण किया। 16,000 फीट की ऊंचाई पर किए गए इस टेस्ट ने यह साबित कर दिया है कि यह सिस्टम चुनौतीपूर्ण इलाकों और कम हवा वाले वातावरण में भी सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है।

प्राइवेट सेक्टर के लिए मौके और निवेश के नजरिए से चुनौतियां

'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत, इन प्रोजेक्ट्स में निजी कंपनियों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। एयरोस्पेस, इलेक्ट्रॉनिक्स और डिफेंस सामग्री बनाने वाली कई प्राइवेट कंपनियां इन प्रोजेक्ट्स के साथ जुड़ी हैं।

हालांकि, निवेशकों को यह याद रखना चाहिए कि:**

  • डेवलपमेंट रिस्क: प्रोटोटाइप से बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन तक का सफर जटिल है, जिसमें देरी की संभावना बनी रहती है।
  • सप्लाई चेन: उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री के लिए ग्लोबल सप्लाई चेन पर निर्भरता और बाजार में उतार-चढ़ाव प्रोजेक्ट्स की लागत को प्रभावित कर सकते हैं।
  • फंडिंग: इस तरह के एडवांस सिस्टम्स के लिए निरंतर फंडिंग की आवश्यकता होती है, जिस पर आने वाले समय में नजर रखना जरूरी है।
Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.