DRDO ने अपने **30 kW** डायरेक्टेड-एनर्जी वेपन सिस्टम के विकास की गति को तेज कर दिया है। यह घातक तकनीक ड्रोन झुंडों को मार गिराने में सक्षम होगी और अगले **1** साल के भीतर इसका प्रोडक्शन मॉडल तैयार होने की उम्मीद है।
स्वदेशी तकनीक की नई उड़ान
DRDO ने अपने 30 kW डायरेक्टेड-एनर्जी वेपन (DEW) सिस्टम पर काम को रफ्तार दी है। इसका मुख्य उद्देश्य दुश्मन के ड्रोन झुंडों और अनमैन्ड एरियल व्हीकल्स (UAVs) को हवा में ही ढेर करना है। DRDO अगले 6 महीनों के भीतर प्राइवेट सेक्टर के लिए 'एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट' जारी करने की योजना बना रहा है, ताकि 12 महीनों में एक फंक्शनल प्रोडक्शन मॉडल तैयार किया जा सके। भविष्य में इसे भारत के एयर डिफेंस फ्रेमवर्क 'सुदर्शन चक्र' में शामिल किया जाएगा।
डिफेंस सेक्टर के लिए गेम चेंजर
यह प्रोजेक्ट भारतीय डिफेंस सेक्टर के लिए 'नॉन-काइनेटिक वॉरफेयर' की दिशा में एक बड़ा कदम है। पारंपरिक मिसाइलों के मुकाबले, ये लेजर हथियार इलेक्ट्रोमैग्नेटिक एनर्जी का इस्तेमाल करते हैं, जो बेहद किफायती हैं। भारी संख्या में आने वाले सस्ते ड्रोन हमलों को रोकने के लिए महंगी मिसाइलें खर्च करना आर्थिक रूप से सही नहीं होता, जहां ये लेजर हथियार एक बेहतर विकल्प साबित होंगे। यह पूरा कदम सरकार की 'आत्मनिर्भर भारत' मुहिम का हिस्सा है, जिसका मकसद विदेशी तकनीक पर निर्भरता को कम करना है।
प्राइवेट कंपनियों के लिए अवसर
DRDO इस बार रिसर्च से मैन्युफैक्चरिंग तक के सफर में निजी कंपनियों को साथ लेकर चल रहा है। पहले भी 10 kW सिस्टम के लिए Larsen & Toubro जैसी बड़ी कंपनियां सहयोग कर चुकी हैं, लेकिन 30 kW का यह वर्जन तकनीक के मामले में कहीं ज्यादा बड़ा और शक्तिशाली है। निवेशकों के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वे उन कंपनियों पर नजर रखें जिन्हें इस प्रोजेक्ट के लिए प्रोडक्शन पार्टनर के रूप में चुना जाएगा।
रिस्क और चुनौतियां
हालांकि यह तकनीक गेम चेंजर हो सकती है, लेकिन बड़े डिफेंस प्रोजेक्ट्स की तरह इसमें भी चुनौतियां बरकरार हैं। हाई-पावर लेजर सिस्टम को स्टेबल रखना, अलग-अलग मौसम में इनका प्रदर्शन और सेना में इनकी फाइनल इंडक्शन की टाइमलाइन कुछ ऐसे फैक्टर्स हैं, जिन पर निवेशकों को पैनी नजर रखनी चाहिए।
