DRDO और Zero mK India की बड़ी साझेदारी, अब भारत में ही बनेंगे Quantum कंप्यूटिंग के 'हथियार'

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
DRDO और Zero mK India की बड़ी साझेदारी, अब भारत में ही बनेंगे Quantum कंप्यूटिंग के 'हथियार'

DRDO ने राजस्थान के स्टार्टअप Zero mK India के साथ हाथ मिलाया है। इस साझेदारी का मकसद **20 mK** क्षमता वाले 'डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर' तैयार करना है, जो क्वांटम कंप्यूटिंग के लिए बेहद जरूरी हैं। यह प्रोजेक्ट **₹500 करोड़** के डिफेंस टेक्नोलॉजी फंड से वित्तपोषित पहला मिशन है।

आत्मनिर्भर भारत की ओर एक बड़ा कदम

क्वांटम कंप्यूटिंग की दुनिया में तापमान को 20 मिलिकेलविन (20 mK) तक ठंडा रखना एक बड़ी चुनौती है। अभी तक भारत इसके लिए पूरी तरह विदेशी सप्लाई चेन पर निर्भर था, लेकिन अब इस साझेदारी से देश में ही इन क्रायोजेनिक उपकरणों का निर्माण होगा। रक्षा मंत्रालय द्वारा आवंटित ₹500 करोड़ के बजट में से यह पहली बड़ी फंडिंग है, जिसका उद्देश्य डीप-टेक और डिफेंस सेक्टर में नवाचार को बढ़ावा देना है।

तकनीकी विशेषज्ञता और सरकारी समर्थन

DRDO की लैब 'सॉलिड स्टेट फिजिक्स लैबोरेटरी' (SSPL) इस स्टार्टअप को तकनीकी मेंटरशिप देगी। यह पूरा प्रोजेक्ट 'टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड' (TDF) स्कीम के तहत आता है, जो उन इंजीनियरिंग चुनौतियों को हल करने में मदद करती है जिन्हें आमतौर पर प्राइवेट कंपनियां रिस्क के चलते नहीं उठातीं।

भविष्य के संकेत और रिस्क

यह कदम 'नेशनल क्वांटम मिशन' का हिस्सा है, जो देश की कंप्यूटिंग पावर और सुरक्षा को मजबूत करने पर केंद्रित है। हालांकि, डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर का निर्माण बेहद जटिल है और इसमें हाई-एंड इंजीनियरिंग की जरूरत होती है। बाजार के जानकारों का मानना है कि भले ही यह प्रोजेक्ट लंबी अवधि में लागत कम करेगा, लेकिन आने वाली तिमाहियों में स्टार्टअप की एग्जीक्यूशन स्पीड और क्वालिटी स्टैंडर्ड्स पर निवेशकों की पैनी नजर रहेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.