DRDO भारतीय वायुसेना के लिए स्वदेशी Software Defined Radio (SDR) सिस्टम तैयार करने के अंतिम चरण में है। साल के अंत तक आने वाले इस बदलाव से इजरायल के B-Net सिस्टम पर निर्भरता कम होगी और Bharat Electronics Limited (BEL) इसकी मैन्युफैक्चरिंग का जिम्मा संभालेगी।
स्वदेशी तकनीक की ओर बढ़ते कदम
DRDO द्वारा विकसित यह नई SDR तकनीक पुरानी हार्डवेयर-आधारित प्रणालियों से कहीं अधिक आधुनिक है। इसमें प्रोग्रामेबल सॉफ्टवेयर का उपयोग किया गया है, जिससे फाइटर जेट्स और ग्राउंड स्टेशनों के बीच संचार न केवल तेज होगा, बल्कि नेटवर्क सिक्योरिटी भी 100% अधिक मजबूत होगी। यह तकनीक भारतीय वायुसेना को विदेशी सप्लायरों पर निर्भरता से छुटकारा दिलाएगी।
BEL के ऑर्डर बुक के लिए बड़ा बूस्ट
Bharat Electronics Limited (BEL) इस प्रोजेक्ट की मुख्य मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर है। कंपनी को DRDO के डिज़ाइन्स को बड़े स्तर पर प्रोडक्शन में बदलने की जिम्मेदारी मिली है। रक्षा क्षेत्र में 'मेक इन इंडिया' के तहत मिल रहे ऐसे बड़े प्रोजेक्ट्स BEL की ऑर्डर बुक को मजबूत करते हैं और भविष्य में कंपनी की मार्केट स्थिति को और बेहतर बनाएंगे।
थिएटरलाइजेशन और भविष्य की तैयारी
यह प्रोजेक्ट सरकार की 'थिएटरलाइजेशन' रणनीति का अहम हिस्सा है, जिसका उद्देश्य सेना, नौसेना और वायुसेना को एक ही संचार नेटवर्क से जोड़ना है। Defence Electronics Applications Laboratory द्वारा तैयार किया गया IRSA (Indian Radio Software Architecture) स्टैंडर्ड यह सुनिश्चित करेगा कि भविष्य में सभी सैन्य उपकरण बिना किसी रुकावट के एक-दूसरे से संवाद कर सकें।
निवेशकों के लिए क्या है महत्वपूर्ण?
साल के अंत तक क्रिटिकल वेवफॉर्म्स (waveforms) का सफल वैलिडेशन होना बहुत जरूरी है। निवेशकों की नजर अब इस बात पर होनी चाहिए कि इन सिस्टम्स का प्रोडक्शन कितनी तेजी से होता है और वायुसेना के बेड़े में इन्हें शामिल करने की रफ्तार क्या रहती है। किसी भी प्रकार का ऑपरेशनल अपडेट BEL के स्टॉक सेंटीमेंट पर सीधा असर डाल सकता है।
