DRDO-CGCRI का बड़ा कदम: ₹50 करोड़ के प्रोजेक्ट से स्वदेशी बुलेटप्रूफ ग्लास तैयार करेगी भारत

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AuthorAditya Rao|Published at:
DRDO-CGCRI का बड़ा कदम: ₹50 करोड़ के प्रोजेक्ट से स्वदेशी बुलेटप्रूफ ग्लास तैयार करेगी भारत

DRDO और CSIR-CGCRI ने एक महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट शुरू किया है, जिसके तहत **₹50 करोड़** के बजट के साथ स्वदेशी बुलेटप्रूफ ग्लास विकसित किया जाएगा। यह **4 साल** का प्रोजेक्ट है जिसका मुख्य उद्देश्य आयात पर निर्भरता कम करना और सैन्य वाहनों की सुरक्षा और गतिशीलता को और बेहतर बनाना है।

डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भरता की ओर

यह प्रोजेक्ट सरकार के 'आत्मनिर्भर भारत' विजन का हिस्सा है। फिलहाल, उच्च गुणवत्ता वाले बुलेटप्रूफ ग्लास के लिए भारत भारी मात्रा में आयात पर निर्भर है, जो न केवल महंगा है बल्कि सप्लाई चेन में भी कई मुश्किलें पैदा करता है। इस प्रोजेक्ट के लिए नेवल मैटेरियल्स रिसर्च लैबोरेटरी और टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लैबोरेटरी जैसी संस्थाएं भी अपना योगदान दे रही हैं ताकि इसकी क्वालिटी डिफेंस मानकों पर खरी उतरे।

वजन में 30% से 50% तक की कमी

वैज्ञानिक ग्लास-सिरेमिक सामग्री का उपयोग कर रहे हैं जिसमें नैनो-स्केल क्रिस्टल लगाए जाएंगे। नई तकनीक के इस्तेमाल से बुलेटप्रूफ ग्लास की मोटाई और वजन को 30% से 50% तक कम किया जा सकेगा। सैन्य वाहनों के लिए कम वजन का मतलब है—बेहतर स्पीड, ज्यादा पेलोड क्षमता और फ्यूल एफिशिएंसी। टेस्टिंग के दौरान यह सामग्री AK-47 जैसी घातक राइफलों की गोलियों को रोकने में सक्षम पाई गई है।

निवेशकों के लिए संकेत

यह अभी एक R&D (रिसर्च एंड डेवलपमेंट) प्रोजेक्ट है, लेकिन भविष्य में जब यह कमर्शियल प्रोडक्शन की ओर बढ़ेगा, तो डिफेंस क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों और ग्लास मैन्युफैक्चरर्स के लिए बड़े अवसर खुल सकते हैं। आने वाले समय में DRDO प्राइवेट कंपनियों के साथ हाथ मिला सकता है, जिससे डिफेंस सेक्टर के शेयरों में नई हलचल देखने को मिल सकती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.