Defence Acquisition Council (DAC) सोमवार को 40 Su-30MKI फाइटर जेट्स की मेंटेनेंस को लेकर एक बड़ी बैठक करने जा रही है। इस प्रोजेक्ट के केंद्र में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) है, जिसके ऑर्डर बुक पर इस फैसले का बड़ा असर पड़ सकता है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में Defence Acquisition Council (DAC) आज 40 Su-30MKI फाइटर जेट्स को अपग्रेड और ओवरहॉल करने के प्रस्ताव पर चर्चा करेगी। भारतीय वायु सेना (IAF) के बेड़े में ये विमान रीढ़ की हड्डी माने जाते हैं और इस मेंटेनेंस प्रोग्राम का मकसद इनकी ऑपरेशनल क्षमता को 15 से 20 साल तक और बढ़ाना है।
HAL के लिए कितना अहम है ये प्रोजेक्ट?
HAL के लिए मेंटेनेंस का काम एक रेगुलर रेवेन्यू स्ट्रीम की तरह है, जो उसकी मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस को मजबूती देता है। कंपनी ने हाल ही में फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में ₹1,589.68 करोड़ का शानदार नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो सालाना आधार पर 14.9% बढ़ा है। कंपनी का EBITDA मार्जिन भी 27.9% के स्तर पर बना हुआ है। अगर यह डील फाइनल होती है, तो यह HAL की ऑर्डर विजिबिलिटी को और बेहतर बनाएगी।
सुरक्षा और चुनौतियां
भारतीय वायु सेना के पास अभी 260 से ज्यादा Su-30MKI विमान हैं। इन विमानों को हर कुछ सालों में डीप ओवरहॉल की जरूरत होती है ताकि वे हर मिशन के लिए तैयार रहें। हालांकि, इस तरह के जटिल प्रोजेक्ट्स में लॉजिस्टिक्स और एवियॉनिक्स अपग्रेड के दौरान तकनीकी चुनौतियां बनी रहती हैं। 'सुपर सुखोई' प्रोग्राम के तहत कंपनी को कॉस्ट कंट्रोल और समय पर प्रोजेक्ट पूरा करने पर ध्यान देना होगा, क्योंकि यही फैक्टर HAL की लॉन्ग टर्म ऑपरेशनल एफिशिएंसी को तय करेगा।
