डिफेंस टेक्नोलॉजी की दुनिया में एक बड़ा दांव खेला गया है! हैदराबाद की कंपनी Constelli ने $20 मिलियन (लगभग ₹166 करोड़) की भारी-भरकम सीरीज़ A फंडिंग हासिल की है। इस महत्वपूर्ण राउंड का नेतृत्व ग्लोबल वेंचर फर्म General Catalyst ने किया, जिसमें 360 One Asset Management और मौजूदा निवेशक Pravega Ventures ने भी हिस्सा लिया। Pravega Ventures इससे पहले जनवरी 2025 में Constelli के $3 मिलियन (लगभग ₹25 करोड़) के प्री-सीरीज़ A राउंड का नेतृत्व कर चुकी है। इस नए फंड का इस्तेमाल कंपनी अपने रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) को बढ़ावा देने के लिए करेगी, खास तौर पर अगली पीढ़ी के इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (EW) और कम्युनिकेशन पेलोड्स को विकसित करने में। इन एडवांस्ड तकनीकों को ड्रोन, ग्राउंड सिस्टम, नौसेना के जहाजों और सैटेलाइट जैसे विभिन्न प्लेटफॉर्म्स के लिए तैयार किया जाएगा।
यह फंडिंग ऐसे समय में आई है जब दुनिया भर में रक्षा खर्च लगातार बढ़ रहा है। भू-राजनीतिक तनाव और राष्ट्रीय सुरक्षा पर बढ़ते फोकस के कारण ग्लोबल मिलिट्री एक्सपेंडिचर 2025 में लगभग $2.7 ट्रिलियन (करीब ₹225 लाख करोड़) तक पहुंच गया है, और इसके और बढ़ने का अनुमान है। 2022 से 2025 के बीच, डिफेंस टेक स्टार्टअप्स ने वैश्विक स्तर पर लगभग $16.8 बिलियन (करीब ₹1.4 लाख करोड़) जुटाए हैं। Constelli जिस इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और सिग्नल प्रोसेसिंग सेगमेंट में काम करती है, उसके 2031 तक $23.85 बिलियन (लगभग ₹2 लाख करोड़) तक पहुंचने का अनुमान है, जिसमें 8.83% की एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) देखने को मिल सकती है।
कंपनी का स्थानीय समाधानों पर ध्यान भारत की 'आत्मनिर्भर भारत' पहल के अनुरूप है, जिसका लक्ष्य विदेशी रक्षा आयात पर निर्भरता कम करना और घरेलू क्षमताओं को मजबूत करना है। $20 मिलियन की इस पूंजी का उपयोग कंपनी अपनी उत्पादन सुविधाओं का विस्तार करने, नई प्रतिभाओं को आकर्षित करने और AI-ड्रिवन मॉडलिंग और सिमुलेशन टूल्स सहित अगली पीढ़ी के प्रोटोटाइप विकसित करने में करेगी, ताकि उत्पादों को तेजी से तैनात किया जा सके।
भारत का डिफेंस इकोसिस्टम भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। 2025 में भारतीय डिफेंस टेक सेक्टर में रिकॉर्ड $247 मिलियन (लगभग ₹2050 करोड़) का निवेश आया, जो 2024 के मुकाबले दोगुना है। यह बढ़ता निवेश इस क्षेत्र में निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी को दर्शाता है। Constelli के प्रोडक्ट्स, जैसे डिजिटल टेलीमेट्री ट्रांसमीटर और EW सिग्नल जनरेशन सूट्स, डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (DRDO) और भारतीय रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) की महत्वपूर्ण जरूरतों को पूरा करते हैं। कंपनी दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर जैसे अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों को भी सेवा प्रदान करती है, जो इसकी वैश्विक बाजार में पैठ बनाने की क्षमता को दर्शाता है।
हालांकि, डिफेंस टेक स्टार्टअप्स के लिए कुछ चुनौतियां भी हैं। रक्षा खरीद प्रक्रिया जटिल और धीमी होती है, जिसमें लंबी सेल्स साइकल्स और कड़े नियम होते हैं। स्टार्टअप्स को अक्सर बड़े पैमाने पर खरीद तक पहुंचने में संघर्ष करना पड़ता है। रियल-वर्ल्ड कंडीशंस में नई तकनीकों का परीक्षण और सत्यापन बेहद कठिन होता है। General Catalyst जैसी बड़ी फर्मों का $5 बिलियन (लगभग ₹41,500 करोड़) भारत में निवेश करने की योजना, इस क्षेत्र में गहरी रुचि को उजागर करती है। Constelli का लक्ष्य इन चुनौतियों से पार पाकर, AI का उपयोग करके विनिर्माण प्रक्रियाओं को बेहतर बनाना और उत्पाद विकास को तेज करना है।
