ट्रेडिंग वॉल्यूम में भारी उछाल से रॉकेट बने शेयर
शुक्रवार को Cochin Shipyard के शेयर 4.10% की जोरदार छलांग लगाकर ₹1,658.10 के स्तर पर बंद हुए। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह रही ट्रेडिंग वॉल्यूम (Trading Volume) में आया तगड़ा उछाल। आज 79.9 लाख से ज्यादा शेयर खरीदे-बेचे गए, जो पिछले 20 दिनों के औसत वॉल्यूम से तीन गुना से भी ज्यादा है। इस भारी-भरकम वॉल्यूम ने निवेशकों की मजबूत दिलचस्पी का संकेत दिया। सबसे खास बात यह रही कि यह तेजी तब आई जब शेयर बाजार का मुख्य सूचकांक Nifty 50 1.13% और Nifty India Defence इंडेक्स 2.04% की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा था।
52-हफ्ते के लो से 40% की रिकवरी
यह शेयर अपने 52-हफ्ते के न्यूनतम स्तर (Low) ₹1,187.00 (जो 30 मार्च 2026 को दर्ज किया गया था) से अब तक करीब 40% का शानदार रिकवरी दिखा चुका है। पिछले एक महीने में शेयर 27.35% का रिटर्न दे चुका है, हालांकि, पिछले छह महीनों में यह 8.90% नीचे भी गया था। यह हालिया प्रदर्शन हाल की मजबूत तेजी को दर्शाता है।
नए ऑर्डर और डिफेंस खर्च ने बढ़ाई रफ्तार
कंपनी को मिले बड़े ऑर्डर इस तेजी की मुख्य वजहों में से हैं। Cochin Shipyard को भारतीय नौसेना (Indian Navy) के लिए पांच Next Generation Survey Vessels बनाने का ₹5,000 करोड़ का बड़ा कॉन्ट्रैक्ट (Contract) मिला है, जिसमें यह सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी रही। इसके अलावा, फ्रांस की CMA CGM Group से $360 मिलियन का एक और अहम ऑर्डर हासिल हुआ है, जिसके तहत छह LNG-पावर्ड कंटेनर जहाज बनाए जाएंगे। इन ऑर्डरों से कंपनी के ऑर्डर बुक का कुल मूल्य बढ़कर करीब ₹23,000 करोड़ हो गया है। ये डील्स (Deals) भारत के रक्षा बजट ₹7.85 लाख करोड़ (जो पिछले साल से 15.2% ज्यादा है) के बढ़ने और कैपिटल स्पेंडिंग (Capital Spending) में करीब 22% की वृद्धि से भी जुड़ी हैं। इस सरकारी प्रोत्साहन का फायदा Cochin Shipyard, Mazagon Dock Shipbuilders और Garden Reach Shipbuilders & Engineers जैसी कंपनियों को मिल रहा है।
वैल्यूएशन को लेकर चिंता और एक्सपर्ट्स की राय में अंतर
हालांकि, इन सकारात्मक खबरों के बावजूद, शेयर के वैल्यूएशन (Valuation) को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। Cochin Shipyard का P/E रेशियो (Price-to-Earnings Ratio) फिलहाल 58.55 के आसपास है, जो इसके 10 साल के औसत P/E 12.73 से काफी ज्यादा है। इससे यह संकेत मिलता है कि शेयर महंगा हो सकता है। एक्सपर्ट्स (Analysts) की राय भी बंटी हुई है; कुछ की रेटिंग 'Sell' है, तो कुछ 'Hold' की सलाह दे रहे हैं, और प्राइस टारगेट्स (Price Targets) में भी काफी अंतर है। कंपनी को BSE और NSE से ₹9,77,040 का रेगुलेटरी फाइन (Regulatory Fine) भी झेलना पड़ा था। इसके अलावा, Q3 नतीजों में रेवेन्यू (Revenue) बढ़ने के बावजूद नेट प्रॉफिट (Net Profit) में 18% की साल-दर-साल गिरावट मार्जिन प्रेशर (Margin Pressure) की ओर इशारा करती है।
भविष्य की रणनीति और सरकारी सपोर्ट
Cochin Shipyard अपनी डिफेंस शिपबिल्डिंग पर मुख्य फोकस बनाए हुए है, साथ ही डोमेस्टिक (Domestic) और इंटरनेशनल (International) क्लाइंट्स के लिए ऑर्डर बुक बढ़ाने की कोशिश कर रही है। कंपनी LNG-पावर्ड जहाजों और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी जैसे नए क्षेत्रों में भी डाइवर्सिफाई (Diversify) कर रही है, जिसके लिए HBL Engineering के साथ एक ज्वाइंट वेंचर (Joint Venture) भी बनाया है। एक पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग (PSU) होने के नाते, कंपनी को सरकार से सपोर्ट मिलता है। लेकिन, शेयर की मौजूदा तेजी को बनाए रखने के लिए कंपनी को अपने ऊंचे वैल्यूएशन, एक्सपर्ट्स की राय में अंतर और गवर्नेंस (Governance) के मुद्दों को प्रभावी ढंग से मैनेज करना होगा।
