Cochin Shipyard Limited ने अमेरिका, जर्मनी और नॉर्वे के क्लाइंट्स के लिए **40** से ज्यादा जहाजों के ऑर्डर हासिल किए हैं। हालांकि, कंपनी के कम मार्जिन वाले कमर्शियल सेगमेंट की ओर बढ़ने और स्टॉक में आई बड़ी गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
ग्लोबल मार्केट में विस्तार
केंद्रीय जहाजरानी मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने जानकारी दी है कि Cochin Shipyard को अमेरिका, जर्मनी और नॉर्वे से 40 से अधिक जहाजों के निर्माण का कॉन्ट्रैक्ट मिला है। यह भारत की मैरीटाइम मैन्युफैक्चरिंग क्षमता के लिए एक बड़ा संकेत है, लेकिन बाजार की प्रतिक्रिया मिली-जुली रही है। स्टॉक अपने जुलाई 2024 के ऑल-टाइम हाई ₹2,979 से लगभग 57% तक गिर चुका है, जो वैल्यूएशन को लेकर निवेशकों के संशय को दिखाता है।
मार्जिन पर दबाव की मुख्य वजह
निवेशकों की चिंता के पीछे बिजनेस मॉडल में बदलाव का कारण है। अब तक कंपनी डिफेंस कॉन्ट्रैक्ट्स पर टिकी थी, जिनमें मुनाफा ज्यादा होता था। अब कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2027 और 2028 के लिए ब्लेंडेड EBITDA मार्जिन का गाइडेंस 14% दिया है, जो फाइनेंशियल ईयर 2026 के 24% से काफी कम है। कमर्शियल शिपबिल्डिंग का मार्जिन आमतौर पर 10-12% ही रहता है, जो प्रॉफिटेबिलिटी पर असर डाल रहा है।
आगे की राह
कंपनी का नेट प्रॉफिट पहली तिमाही में 20% (YoY) गिरा है। अब सारा दारोमदार कंपनी के ₹21,900 करोड़ के ऑर्डर बुक के सही एग्जीक्यूशन पर है। इसके अलावा, Drydocks World - Dubai के साथ जॉइंट वेंचर और ऑपरेशनल एफिशिएंसी को लेकर कंपनी के अगले कदम अहम होंगे। क्या मैनेजमेंट इस कॉम्पिटिटिव मार्केट में प्रॉफिट मार्जिन को बचा पाएगा? यह देखना बाकी है।
