कीव स्थित स्टार्टअप CODE380 ने एक पोर्टेबल डिवाइस 'D-Vision SDR' पेश किया है, जो रूसी ड्रोन के अनएन्क्रिप्टेड वीडियो सिग्नल को इंटरसेप्ट करने में सक्षम है। यह इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर में एक अस्थायी बढ़त देता है, हालांकि डिजिटल एन्क्रिप्शन के बढ़ते दौर में इसकी लंबी अवधि की उपयोगिता पर सवाल उठ रहे हैं।
अगस्त 2026 में स्थापित कीव की टेक्नोलॉजी स्टार्टअप CODE380 ने अपना नया प्रोडक्ट D-Vision SDR पेश किया है। यह एक पॉकेट-साइज़ सॉफ्टवेयर-डिफाइंड रेडियो रिसीवर है, जिसे रूसी मानवरहित हवाई वाहनों (UAVs) द्वारा प्रसारित किए जा रहे लाइव वीडियो फीड्स को पकड़ने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह डिवाइस 500 MHz से 8,700 MHz तक की फ्रीक्वेंसी रेंज पर काम करता है।\n\nपुराने फिक्स्ड-फ्रीक्वेंसी रिसीवर्स के विपरीत, इसमें सॉफ्टवेयर-आधारित आर्किटेक्चर का इस्तेमाल किया गया है। लगभग 8 लोगों की छोटी टीम वाली यह कंपनी सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए फ्रीक्वेंसी बदलने पर भी डिवाइस को अपडेट करने में सक्षम है।\n\n### क्या है निवेश का जोखिम?\n\nवित्तीय नजरिए से देखा जाए तो, CODE380 अभी एक शुरुआती दौर की प्राइवेट स्टार्टअप है। यह किसी भी स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड नहीं है और इसके रेवेन्यू या फाइनेंशियल हेल्थ का कोई पब्लिक डेटा उपलब्ध नहीं है। डिफेंस-टेक सेक्टर की ऐसी कंपनियों को निवेशक 'हाई-रिस्क' मानते हैं क्योंकि इनकी सफलता सीमित तकनीकी जीवनचक्र और तत्काल युद्ध संबंधी जरूरतों पर टिकी होती है।\n\nभविष्य में, जैसे-जैसे युद्धक्षेत्र में AI-गाइडेड सिस्टम और एन्क्रिप्टेड डिजिटल लिंक का इस्तेमाल बढ़ेगा, इस तरह के सिग्नल-इंटरसेप्शन डिवाइस की उपयोगिता कम हो सकती है। कंपनी की लंबी अवधि की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वे कितनी तेजी से अपनी तकनीक को और अधिक जटिल डिजिटल सिग्नेचर्स को पहचानने में सक्षम बनाते हैं।
