C2C Advanced Systems: 2 दिन में 40% टूटा शेयर! IPO के बाद क्यों मचा हाहाकार?

AEROSPACE-DEFENSE
Whalesbook Logo
AuthorAditya Rao|Published at:
C2C Advanced Systems: 2 दिन में 40% टूटा शेयर! IPO के बाद क्यों मचा हाहाकार?

C2C Advanced Systems के शेयरों में पिछले दो दिनों में **40%** की भारी गिरावट आई है। आज यानी 21 जुलाई 2026 को शेयर **20%** लोअर सर्किट तोड़ते हुए **₹268.15** पर आ गया। यह बड़ी गिरावट दिसंबर 2024 में कंपनी के IPO के बाद से लगातार जारी अस्थिरता का नतीजा है।

Detailed Coverage

क्यों आई शेयरों में इतनी बड़ी गिरावट?

C2C Advanced Systems लिमिटेड, जो डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स और C4I सिस्टम्स बनाती है, के शेयरों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। 21 जुलाई 2026 को शेयर 20% लोअर सर्किट पर ₹268.15 पर बंद हुआ। पिछले लगातार दो ट्रेडिंग सेशन में इस स्टॉक ने अपने IPO के बाद से बनाई गई अधिकांश तेजी गंवा दी है।

IPO पर नजर और रेगुलेटरी एक्शन

दिसंबर 2024 में C2C Advanced Systems का IPO आया था, जिसमें निवेशकों ने जमकर पैसा लगाया था और इश्यू 125 गुना सब्सक्राइब हुआ था। IPO प्राइस ₹226 था, और लिस्टिंग के दिन ही शेयर 90% प्रीमियम पर खुला था। लेकिन, लिस्टिंग के बाद से कंपनी का सफर जांच के घेरे में रहा। IPO से पहले, SEBI (सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) ने निवेशकों की शिकायतों पर एक्शन लिया था, क्योंकि फंड के गलत इस्तेमाल की आशंका थी। इसके चलते, SEBI ने कंपनी के इंडिपेंडेंट ऑडिटर नियुक्त करने और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) से एक मॉनिटरिंग एजेंसी बनाने का आदेश दिया, ताकि यह देखा जा सके कि कंपनी पब्लिक से जुटाए गए पैसों का इस्तेमाल कैसे कर रही है।

बड़े निवेशकों की हिस्सेदारी

शेयरों में तेजी के दौरान कई बड़े निवेशकों ने C2C Advanced Systems पर दांव लगाया। मार्च 2026 के शेयर होल्डिंग डेटा के अनुसार, फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) की कंपनी में 3.18% हिस्सेदारी है। इसके अलावा, आशीष कचोलिया के पास 3.82% और मुकुल अग्रवाल के पास 2.75% शेयर हैं। बंगाल फाइनेंस की भी 1.27% हिस्सेदारी है।

बिजनेस मॉडल और निवेशकों के लिए मुख्य बिंदु

C2C Advanced Systems डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स और C4I (कमांड, कंट्रोल, कम्युनिकेशन, कंप्यूटर्स और इंटेलिजेंस) सिस्टम्स के खास क्षेत्र में काम करती है। SME सेगमेंट की कंपनी होने के नाते, इसके शेयर की कीमतों में बड़े डिफेंस कंपनियों की तुलना में ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कंपनी रेगुलेटर के निर्देशों के अनुसार फंड का उपयोग कैसे करती है। कंपनी की स्थिर ऑपरेशन बनाए रखने और डिफेंस कॉन्ट्रैक्ट्स को पूरा करने की क्षमता, साथ ही रेगुलेटरी निगरानी को मैनेज करना, बाजार के लिए मुख्य फैक्टर होगा। निवेशक यह जानने के लिए मॉनिटरिंग एजेंसी से भविष्य के अपडेट पर नजर रख सकते हैं कि कंपनी का कैपिटल खर्च IPO के मूल उद्देश्यों के अनुरूप है या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.