Boeing की 777 और 767 असेंबली लाइन्स सप्लायर विवाद के कारण बुरी तरह प्रभावित हैं। दो महीने के ठप काम से कंपनी को हर दिन **$6.5 मिलियन** का नुकसान हो रहा है, जिससे **2026** के डिलीवरी टारगेट पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
सप्लायर से विवाद और उत्पादन पर असर
Boeing की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। विंग असेंबली के लिए जरूरी 'ट्रेलिंग-एज रिब किट्स' की कमी के चलते 777 Freighter और 767 मॉडल का उत्पादन पिछले 2 महीनों से बुरी तरह प्रभावित है। हालांकि सितंबर के अंत में फ्लोरिडा स्थित सप्लायर Vaero के साथ कानूनी समझौता हो गया है, लेकिन कामकाज को सामान्य स्तर पर लाने में अभी भी पसीना छूट रहा है।
भारी आर्थिक चोट
इस बाधा के कारण कंपनी को हर दिन लगभग $6.5 मिलियन का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। हालात इतने गंभीर हैं कि कंपनी को असेंबली लाइन से आधे बने विमानों को हटाना पड़ा ताकि दूसरी गतिविधियों के लिए जगह बनाई जा सके। प्रभावित विमानों में FedEx को डिलीवर होने वाला कम से कम एक यूनिट भी शामिल है। राहत की बात सिर्फ इतनी है कि नया 777X मॉडल, जिसमें अलग विंग स्ट्रक्चर है, इस विवाद से दूर है।
इन-हाउस मैन्युफैक्चरिंग की तैयारी
भविष्य में सप्लाई चेन के जोखिमों से बचने के लिए, Boeing अब इन महत्वपूर्ण विंग कंपोनेंट्स को अपने ही फैसिलिटीज में बनाने की योजना बना रहा है। इस फैसले के लिए इक्विपमेंट और ट्रेनिंग पर बड़ा निवेश करना होगा, जिससे शॉर्ट-टर्म में कैश फ्लो पर दबाव पड़ सकता है। कंपनी की कोशिश है कि वह बाहरी सप्लायर्स पर निर्भरता कम करे।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
इन्वेस्टर्स के लिए सबसे बड़ा सवाल 2026 के डिलीवरी गोल्स का है। इस साल अब तक 21 फ्रेटर्स की डिलीवरी हो चुकी है, लेकिन दो महीने के गैप ने अगले लक्ष्यों को मुश्किल बना दिया है। फिलहाल नजरें इस पर हैं कि Boeing कितनी तेजी से अपनी इन-हाउस मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को खड़ा कर पाता है और क्या यह ग्लोबल एयरोस्पेस चेन में भारत जैसे देशों के कंपोनेंट सप्लायर्स को भी प्रभावित करेगा या नहीं।
