DGCA पर कसा शिकंजा: क्या एयरलाइंस में रिश्तेदारों को नौकरी दिलाने में अधिकारियों की थी भूमिका?

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AuthorNeha Patil|Published at:
DGCA पर कसा शिकंजा: क्या एयरलाइंस में रिश्तेदारों को नौकरी दिलाने में अधिकारियों की थी भूमिका?

भारत के नागर विमानन मंत्रालय (Ministry of Civil Aviation) ने डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) को सख्त हिदायत दी है। DGCA के अधिकारियों पर आरोप है कि वे अपने रिश्तेदारों को एयरलाइंस में नौकरी दिलाने में हितों का टकराव (Conflict of Interest) कर रहे हैं। एयर इंडिया और इंडिगो जैसी बड़ी एयरलाइंस में ऐसे **59** पारिवारिक संबंधों का खुलासा हुआ है, जिससे मंत्रालय चिंतित है।

Detailed Coverage

रेगुलेटर की इंटीग्रिटी पर सवाल?

नागर विमानन मंत्रालय ने DGCA को एक कड़ी चेतावनी जारी की है। मामला DGCA के उन अधिकारियों से जुड़ा है जिन पर आरोप है कि वे अपने परिवार के सदस्यों को एविएशन इंडस्ट्री में नौकरी दिलाने के लिए अपने पद का दुरुपयोग कर रहे हैं। सरकारी दस्तावेजों से पता चलता है कि एविएशन रेगुलेटर अब तक इस मामले में नियमों को लागू कराने में नाकाम रहा है, जिससे भारत की एविएशन सेफ्टी (aviation safety) पर नज़र रखने वाली संस्था की निष्पक्षता और निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

31 जनवरी 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, DGCA के 51 अधिकारियों ने 59 ऐसे रिश्तेदारों की जानकारी दी है जो इंडिगो (IndiGo) और एयर इंडिया (Air India) जैसी प्रमुख घरेलू एयरलाइंस के साथ-साथ एयरबस इंडिया (Airbus India) जैसी ग्लोबल कंपनियों और कई एविएशन ट्रेनिंग संस्थानों में काम कर रहे हैं। मंत्रालय को चिंता है कि इन संबंधों के चलते DGCA के वे अधिकारी जो रेगुलेटरी अप्रूवल (regulatory approvals) देने के लिए जिम्मेदार हैं, वे उन एयरलाइंस के प्रति पक्षपाती रवैया अपना सकते हैं जहाँ उनके रिश्तेदार काम करते हैं।

पारदर्शिता की चुनौती

मंत्रालय का यह कदम DGCA के लिए एक बार फिर पारदर्शिता बनाए रखने की चुनौती को उजागर करता है। रिकॉर्ड बताते हैं कि सरकार 2025 के मध्य से ही इन हितों के टकराव को बेहतर तरीके से मैनेज करने का दबाव बना रही है। एक अहम मामले में, मंत्रालय ने DGCA के पूर्व नेतृत्व के उस अनुरोध को भी खारिज कर दिया था जिसमें वे इन अनुशासनात्मक मामलों को आंतरिक रूप से निपटाना चाहते थे। मंत्रालय का कहना है कि रेगुलेटर अभी भी देरी के लिए जवाबदेही तय करने और उन मामलों को ठीक से संबोधित करने में असमर्थ है जहाँ अधिकारी उन एयरलाइंस को मंजूरी देने में शामिल थे जहाँ उनके रिश्तेदार काम करते हैं।

यह गवर्नेंस (governance) की जांच DGCA के लिए एक मुश्किल समय में आई है। रेगुलेटर फिलहाल कई अहम मुद्दों से निपट रहा है, जिसमें एक अधिकारी से जुड़े रिश्वतखोरी के आरोपों की संघीय पुलिस जांच और अमेरिकी फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (U.S. Federal Aviation Administration) द्वारा आगामी सुरक्षा ऑडिट (safety audit) की तैयारी शामिल है। इसके अलावा, प्रमुख एयरलाइंस द्वारा हालिया ऑपरेशनल चूक (operational lapses) और एयर इंडिया से जुड़े एक बड़े हवाई हादसे के बाद DGCA पर सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाने का दबाव बढ़ा हुआ है।

मार्केट पर असर की चिंता

निवेशकों और इंडस्ट्री जानकारों के लिए सबसे बड़ी चिंता रेगुलेटरी निगरानी (regulatory oversight) पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर है। भारत का एविएशन सेक्टर फिलहाल तेजी से बढ़ रहा है, एयरलाइंस नए विमानों के बड़े ऑर्डर दे रही हैं और अपनी क्षमता बढ़ा रही हैं। अगर रेगुलेटर की इंटीग्रिटी पर सवाल उठता है या वह आंतरिक प्रभाव के प्रति संवेदनशील पाया जाता है, तो इससे बाहरी निगरानी कड़ी हो सकती है, महत्वपूर्ण सुरक्षा सर्टिफिकेशन में देरी हो सकती है, या संबंधित एयरलाइंस पर ऑपरेशनल जांच बढ़ सकती है।

निवेशक इस बात पर नज़र रख सकते हैं कि क्या ये रेगुलेटरी चुनौतियाँ DGCA के भीतर मैनेजमेंट या नीतियों में और बदलाव लाएंगी। हितों के टकराव को हल करने में रेगुलेटर की प्रभावशीलता, साथ ही आगामी अमेरिकी सुरक्षा ऑडिट के नतीजे, सेक्टर की दीर्घकालिक स्थिरता और रेगुलेटरी माहौल के महत्वपूर्ण संकेतक होंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.