9वें Bengaluru Space Expo में Australia और India ने स्पेस और टेक्नोलॉजी सेक्टर में अपने संबंधों को और मजबूत किया है। यह कोलैबोरेशन मुख्य रूप से ISRO के Gaganyaan मिशन के लिए टेलीमेट्री और रिकवरी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदान करने पर केंद्रित है, जिससे प्राइवेट एयरोस्पेस कंपनियों के लिए नई संभावनाएं खुल गई हैं।
बेंगलुरु इंटरनेशनल एग्जिबिशन सेंटर में आयोजित 9वें Bengaluru Space Expo (BSX) 2026 में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच स्पेस और टेक्नोलॉजी को लेकर रणनीतिक साझेदारी गहराती दिखी है। इस इवेंट में साफ हुआ कि ऑस्ट्रेलिया अब भारत के महत्वकांक्षी Gaganyaan ह्यूमन स्पेसफ्लाइट प्रोग्राम में अहम भूमिका निभा रहा है।
मिशन में ऑस्ट्रेलिया की भूमिका
ऑस्ट्रेलिया अपनी Cocos Keeling Islands पर स्थित ग्राउंड स्टेशन्स के जरिए टेलीमेट्री ट्रैकिंग सर्विस मुहैया करा रहा है। इससे भारतीय स्पेसक्राफ्ट की ऑर्बिट में लगातार निगरानी संभव हो पाएगी। इतना ही नहीं, समुद्र में स्पलैशडाउन (Splashdown) की स्थिति में रेस्क्यू और रिकवरी ऑपरेशन के लिए भी यह एक महत्वपूर्ण 'सेफ्टी नेट' का काम करेगा।
PACTS के जरिए बढ़ेगा कारोबार
दोनों देशों ने Partnership for Cyber, Critical Technologies, and Supply Chains (PACTS) फ्रेमवर्क के तहत औपचारिक करार किया है। एक्सपो के दौरान 30 ऑस्ट्रेलियन कंपनियां भारत पहुंची हैं, जो सैटेलाइट डिजाइन, रोबोटिक्स और अर्थ ऑब्जर्वेशन जैसे क्षेत्रों में एक्सपर्ट हैं। इससे भारतीय प्राइवेट एयरोस्पेस और डिफेंस कंपनियों के लिए ग्लोबल सप्लाई चेन का हिस्सा बनने के नए दरवाजे खुल गए हैं।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
निवेशकों को इस सेक्टर में एक बैलेंस्ड नजरिया रखने की जरूरत है। हालांकि यह डील ग्रोथ का संकेत है, लेकिन यह पूरी तरह से सरकारी पॉलिसी और डिप्लोमेटिक फैसलों पर निर्भर है। साथ ही, स्पेस मिशन की कॉम्प्लेक्सिटी और प्रोजेक्ट में देरी की संभावनाओं को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। भविष्य में कंपनियों के बीच होने वाले कमर्शियल MoUs और प्रोजेक्ट टाइमलाइन पर नजर रखना मुनाफे की दृष्टि से काफी जरूरी होगा।
