Apollo Micro Systems ने **₹80.84 करोड़** के नए ऑर्डर हासिल किए हैं। ये ऑर्डर डिफेंस, सरकारी और प्राइवेट कंपनियों से मिले हैं। हालांकि, इन बड़े सौदों के बावजूद, **1.45%** की गिरावट के साथ शेयर में नरमी देखी गई, क्योंकि बाजार में गिरावट का माहौल था।
नए ऑर्डर से कंपनी को मिली राहत
रक्षा क्षेत्र की कंपनी Apollo Micro Systems Ltd (AMSL) ने 17 अगस्त 2026 को घोषणा की कि उन्हें ₹80.84 करोड़ के नए ऑर्डर मिले हैं। इन ऑर्डर्स में डिफेंस पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स, राज्य सरकारें और प्राइवेट सेक्टर की कंपनियां शामिल हैं। यह कंपनी के लिए एक अच्छी खबर है, क्योंकि हाल ही में 5 अगस्त 2026 को उन्हें DRDO और अन्य संस्थाओं से ₹213.39 करोड़ का एक और बड़ा कॉन्ट्रैक्ट मिला था।
बाजार में क्यों गिरी Apollo Micro Systems की चाल?
ऑर्डर बुक मजबूत होने के बावजूद, Apollo Micro Systems के शेयरों पर दबाव देखा गया। 17 अगस्त को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर शेयर 1.45% गिरकर ₹387.85 पर बंद हुआ। इसकी मुख्य वजह व्यापक बाजार में आई गिरावट रही। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी (Nifty) जैसे प्रमुख सूचकांकों में भी गिरावट आई, जिसका असर AMSL के शेयरों पर भी पड़ा।
निवेशकों के लिए चिंता के कारण
कंपनी लगातार नए ऑर्डर तो जीत रही है, लेकिन कुछ ऐसे बिजनेस Challenges हैं जिन पर निवेशकों की पैनी नजर है:
- हायर डेटर डेज़ (High Debtor Days): कंपनी के फाइनेंशियल रिकॉर्ड्स बताते हैं कि ग्राहकों से पेमेंट वसूलने में काफी समय लगता है। इससे कंपनी की लिक्विडिटी (तरलता) पर दबाव आ सकता है, अगर इसे ठीक से मैनेज न किया जाए।
- प्रमोटर की गिरवी रखी हिस्सेदारी: कंपनी के प्रमोटर्स ने अपनी लगभग 30.5% हिस्सेदारी लोन के लिए गिरवी रखी हुई है। अगर शेयर की कीमत गिरती है, तो यह प्रमोटर्स और कंपनी के लिए जोखिम भरा हो सकता है।
अधिग्रहण की योजना
इन सबके अलावा, Apollo Micro Systems अपनी बिजनेस पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रही है। कंपनी Premier Explosives Limited में 26% हिस्सेदारी खरीदने पर विचार कर रही है। हाल ही में, उन्हें इस अधिग्रहण के लिए SEBI (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) से ड्राफ्ट लेटर ऑफ ऑफर पर अंतिम टिप्पणियां मिली हैं, जो एक महत्वपूर्ण रेगुलेटरी कदम है। हालांकि, यह अधिग्रहण कंपनी के लिए ग्रोथ के नए रास्ते खोल सकता है, लेकिन इसके साथ ही एक्जीक्यूशन और फंडिंग से जुड़े जोखिम भी जुड़े हैं। आने वाली तिमाहियों में, कंपनी की मौजूदा ऑर्डर बुक को मैनेज करते हुए इस अधिग्रहण को सफलतापूर्वक पूरा करने की क्षमता पर निवेशकों की नजर रहेगी।
