Gujarat Authority for Advance Ruling (AAR) ने एयरबस (Airbus) को निर्देश दिया है कि उन्हें गुजरात में GST के लिए रजिस्टर करना होगा। यह फैसला **₹1,914.5 करोड़** के उस रक्षा सौदे से जुड़ा है, जिसके तहत एयरबस को रक्षा मंत्रालय को **40 C-295MW** एयरक्राफ्ट की सप्लाई करनी है।
फैसले के पीछे की वजह
हालांकि वडोदरा में इन विमानों का निर्माण टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स (Tata Advanced Systems) द्वारा किया जा रहा है, लेकिन AAR ने स्पष्ट किया है कि विमानों के मालिकाना हक का कानूनी ट्रांसफर एयरबस के पास होता है। चूँकि इस सौदे की वैल्यू राज्य की ₹20 लाख की GST रजिस्ट्रेशन सीमा से कहीं अधिक है, इसलिए एयरबस को कर अनुपालन (Tax Compliance) के दायरे में आना होगा।
डिफेंस सेक्टर पर असर
यह निर्णय 'मेक इन इंडिया' प्रोजेक्ट्स में शामिल विदेशी कंपनियों के लिए एक अहम मिसाल है। अब तक कई कंपनियां मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर के होने पर स्थानीय टैक्स नियमों से राहत की उम्मीद करती थीं, लेकिन इस फैसले ने साफ कर दिया है कि प्राथमिक कॉन्ट्रैक्ट होल्डर की जवाबदेही बनी रहेगी।
भविष्य की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भविष्य के अंतरराष्ट्रीय डिफेंस कॉन्ट्रैक्ट्स की संरचना में बदलाव आएगा। अब ग्लोबल फर्म्स को अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग और ऑपरेशनल सेटअप में राज्य-स्तरीय टैक्स नियमों को प्रमुखता से शामिल करना होगा, ताकि किसी भी कानूनी जटिलता से बचा जा सके।
