एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित ने नए चीफ ऑफ एयर स्टाफ के रूप में कार्यभार संभाल लिया है। उन्होंने ए पी सिंह की जगह ली है। यह बदलाव डिफेंस सेक्टर के लिए बेहद अहम है, क्योंकि IAF की खरीदारी और आधुनिकीकरण की नीतियां सीधे तौर पर घरेलू एयरोस्पेस कंपनियों के ऑर्डर बुक को प्रभावित करती हैं।
डिफेंस सेक्टर पर असर
एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित ने शनिवार को आधिकारिक तौर पर 'रेस कोर्स एयर फोर्स स्टेशन' पर पदभार ग्रहण किया। यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब डिफेंस सेक्टर में स्वदेशी मैन्युफैक्चरिंग पर सबसे ज्यादा जोर दिया जा रहा है। डिफेंस सेक्टर के निवेशकों के लिए यह एक बड़ा इवेंट है, क्योंकि भारतीय वायु सेना की प्रोक्योरमेंट रणनीति ही HAL (Hindustan Aeronautics Ltd) और BEL (Bharat Electronics Ltd) जैसी कंपनियों की रेवेन्यू ग्रोथ तय करती है।
नई कमान, नई रणनीति
आशुतोष दीक्षित का 40 साल का अनुभव और तेजस (Tejas), मिराज-2000 और जगुआर जैसे फाइटर जेट्स को उड़ाने का उनका बैकग्राउंड डिफेंस कंपनियों के लिए सकारात्मक संकेत हो सकता है। बाजार इस बात पर नजर रखेगा कि नए चीफ के आने के बाद नए टेंडर और प्रोजेक्ट्स की मंजूरी की गति कैसी रहती है।
निवेशकों के लिए क्या है मुख्य मॉनिटरेबल?
डिफेंस सेक्टर के शेयर अभी 'मेक इन इंडिया' की थीम पर चल रहे हैं। नए चीफ की प्राथमिकताओं में अगर अनमैन्ड एरियल सिस्टम्स (UAS), सेंसर टेक्नोलॉजी और मौजूदा फ्लीट के मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट्स शामिल रहते हैं, तो इससे जुड़ी कंपनियों को सीधे फायदा होगा। मार्केट अब यह देख रहा है कि कैपिटल एक्सपेंडिचर की रफ्तार कैसे बढ़ती है और क्या प्रोजेक्ट्स की डिलीवरी तय समय सीमा में पूरी हो पाती है या नहीं।
