Precision मैन्युफैक्चरर Aequs ने फ्रेंच एरोस्पेस दिग्गज Safran के साथ अपने सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट्स को और बढ़ा दिया है। इससे अब Airbus और Boeing के प्लेटफॉर्म्स के लिए कंपनी की भूमिका और अहम हो गई है। कंपनी का ऑर्डर बुक तो **$1 बिलियन** के पार है, लेकिन प्रॉफिटेबिलिटी की चुनौती निवेशकों के लिए चिंता का सबब बनी हुई है।
एरोस्पेस सेक्टर की दिग्गज कंपनी Aequs ने 12 अक्टूबर, 2026 को फ्रेंच लीडर Safran के साथ अपने लंबे समय के सहयोग को और विस्तार देने का ऐलान किया है। नई डील के तहत, अब Aequs Safran की छह अलग-अलग एंटिटीज के लिए सप्लायर के तौर पर काम करेगी, जिसमें Safran Aerosystems और Safran Electronics & Defense शामिल हैं। यह साझेदारी दस साल पुरानी है, जिसके तहत कंपनी पहले ही Airbus A320 फैमिली के लिए व्हील मैन्युफैक्चरिंग का काम हासिल कर चुकी है।
प्रोडक्शन और एक्सपेंशन
इस करार के तहत कंपनी सुपर-अलॉय कंपोनेंट्स, प्रिसिजन मशीनिंग और लैंडिंग गियर की असेंबली जैसे क्रिटिकल पार्ट्स बनाएगी। ये पार्ट्स Airbus A320, A330, A350 और Boeing 787 जैसे बड़े कमर्शियल एयरक्राफ्ट प्रोग्राम्स के काम आएंगे। इस काम को संभालने के लिए कंपनी कर्नाटक के बेलगावी और तमिलनाडु के होसुर स्थित मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम का इस्तेमाल कर रही है।
फाइनेंशियल रिपोर्ट का असली सच
कंपनी के हालिया नतीजों पर नजर डालें तो तस्वीर थोड़ी पेचीदा है। फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू 55% बढ़कर ₹395.5 करोड़ रहा, लेकिन इसके बावजूद कंपनी को ₹53 करोड़ का नेट लॉस हुआ है। रेवेन्यू में उछाल के बाद भी मुनाफा न होना, नई मैन्युफैक्चरिंग लाइन्स लगाने की बढ़ती लागत को दर्शाता है।
निवेशकों के लिए रिस्क फैक्टर्स
Aequs का लगभग 81% रेवेन्यू सिर्फ एरोस्पेस सेक्टर से आता है, जो इसे काफी संवेदनशील बनाता है। अगर ग्लोबल लेवल पर एयरक्राफ्ट की डिमांड में सुस्ती आती है या Airbus और Boeing अपने प्रोडक्शन रेट में कटौती करते हैं, तो इसका सीधा असर कंपनी के कामकाज पर पड़ेगा।
अब देखने वाली बात यह होगी कि कंपनी होसुर और बेलगावी में अपनी ऑपरेशंस को कितनी कुशलता से स्केल करती है और कब तक यह रेवेन्यू ग्रोथ नेट प्रॉफिट में तब्दील हो पाती है।
