Adani Defence & Aerospace ने Indo-Russian Rifles Private Limited के साथ 5 साल का बड़ा करार किया है। इस डील के तहत कंपनी AK-203 राइफल के लिए **7.62x39 mm** एम्युनिशन की सप्लाई करेगी, जो 'मेक इन इंडिया' के तहत डिफेंस सेक्टर में एक बड़ा कदम है।
डिफेंस सेक्टर में Adani की धाक
उत्तर प्रदेश के कोरवा में स्थित फैसिलिटी में 6 लाख से ज्यादा AK-203 असॉल्ट राइफलें बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के लिए अब Adani Defence & Aerospace ने जरूरी गोला-बारूद सप्लाई करने की जिम्मेदारी संभाल ली है। IRRPL (Indo-Russian Rifles Private Limited) के साथ हुई यह डील सप्लाई चेन को मजबूत करने का काम करेगी।
निवेशकों के लिए जरूरी बात
निवेशकों को यह स्पष्ट होना चाहिए कि Adani Defence & Aerospace फिलहाल एक अनलिस्टेड कंपनी है। यह Adani Enterprises Limited की सब्सिडियरी है, जो डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में अपनी पैठ लगातार बढ़ा रही है। हालांकि यह शेयर बाजार में सीधे उपलब्ध नहीं है, लेकिन डिफेंस सेक्टर में कंपनी के इस तरह के बड़े ऑर्डर Adani Enterprises के लॉन्ग-टर्म ग्रोथ विजन और ऑर्डर बुक को मजबूती देते हैं।
कानपुर में तैयार हो रहा हब
कानपुर में अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के जरिए कंपनी अब छोटे कैलिबर के गोला-बारूद बनाने में एक्सपर्ट बन रही है। यह काम काफी कॉम्प्लेक्स है, जिसके लिए सख्त क्वॉलिटी स्टैंडर्ड्स की जरूरत होती है। इस तरह के सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स से कंपनी को लंबे समय तक स्टेबल रेवेन्यू मिलने की उम्मीद है।
सेक्टर के जोखिम और चुनौतियां
डिफेंस सेक्टर में काम करना आसान नहीं है। इसमें भारी कैपिटल खर्च (Capex) और लंबे गेस्टेशन पीरियड की जरूरत होती है। मुनाफा पूरी तरह से सरकारी पॉलिसी, बजट एलोकेशन और कड़े रेगुलेटरी अप्रूवल्स पर टिका होता है। मैन्युफैक्चरिंग में तकनीकी खामियां या कच्चा माल मिलने में देरी, सीधे प्रॉफिट मार्जिन और प्रोजेक्ट की टाइमलाइन पर असर डाल सकती है। भविष्य में इस प्रोग्राम की रफ्तार और डिलीवरी पर नजर रखना निवेशकों के लिए जरूरी होगा।
